पालघर: दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे परियोजना का मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया निरीक्षण, कहा– देश की आर्थिक प्रगति को मिलेगी नई गति।

पालघर: दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे परियोजना का मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया निरीक्षण, कहा– देश की आर्थिक प्रगति को मिलेगी नई गति।

अखिलेश चौबे 
पालघर। देश की सबसे महत्वाकांक्षी आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे (वडोदरा–मुंबई खंड) के निर्माण कार्यों का महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पालघर जिले के दौरे के दौरान स्थलीय निरीक्षण किया। इस अवसर पर उन्होंने परियोजना की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि भारत सरकार द्वारा लगभग एक लाख करोड़ रुपये की लागत से निर्मित किया जा रहा यह लगभग 1,400 किलोमीटर लंबा, आठ लेन वाला ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे देश की सबसे महत्वपूर्ण संपर्क परियोजनाओं में से एक है। यह एक्सप्रेसवे हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र सहित पांच राज्यों को आपस में जोड़ेगा। इसके पूर्ण होने के बाद दिल्ली और मुंबई के बीच यात्रा का समय उल्लेखनीय रूप से कम होगा तथा देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों के बीच संपर्क और अधिक मजबूत बनेगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण (JNPA) से इसकी सीधी कनेक्टिविटी है। इससे उत्तर भारत से जेएनपीए तक माल परिवहन पहले की तुलना में अधिक तेज, किफायती और सुगम होगा। साथ ही देश की लॉजिस्टिक व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी और उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में भी वृद्धि होगी।
उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में वडोदरा–मुंबई खंड की कुल लंबाई लगभग 157 किलोमीटर है, जिस पर लगभग 24 हजार करोड़ रुपये की लागत से कार्य किया जा रहा है। इस खंड को सात निर्माण पैकेजों में विकसित किया जा रहा है। इनमें से पांच पैकेजों का कार्य पूर्ण होकर यातायात के लिए तैयार है, जबकि शेष दो पैकेज अगस्त 2026 तक पूरे होने की संभावना है। राज्य सरकार का लक्ष्य 31 अगस्त 2026 तक महाराष्ट्र से गुजरने वाले पूरे मार्ग को यातायात के लिए खोलने का है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद वडोदरा से मुंबई तक की यात्रा का समय लगभग आठ घंटे से घटकर चार घंटे रह जाएगा। इससे यात्रियों को तेज, सुरक्षित और जाम-मुक्त यात्रा का अनुभव मिलेगा। इसके साथ ही व्यावसायिक एवं औद्योगिक परिवहन को भी नई गति प्राप्त होगी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में ठाणे, भिवंडी और घोड़बंदर मार्ग पर भारी यातायात के कारण माल परिवहन में समय और ईंधन की बड़ी मात्रा में बर्बादी होती है। नए एक्सप्रेसवे के शुरू होने से यह समस्या काफी हद तक समाप्त होगी और माल परिवहन के लिए तेज एवं विश्वसनीय वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर एवं पश्चिम भारत के औद्योगिक क्षेत्रों को मुंबई के बंदरगाह नेटवर्क से बेहतर संपर्क मिलने से निर्यात, उद्योग, निवेश और रोजगार सृजन को व्यापक बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना देश की राजधानी दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई को आधुनिक एवं उच्चस्तरीय सड़क नेटवर्क से जोड़ने वाला एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी तथा भारत की आधारभूत संरचना और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
निरीक्षण के दौरान वन मंत्री एवं पालघर जिले के पालक मंत्री गणेश नाईक, मत्स्य व्यवसाय एवं बंदरगाह मंत्री नितेश राणे, सांसद डॉ. हेमंत सवरा, विधायक स्नेहा दुबे–पंडित, विधायक राजन नाईक, कोकण परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक चंद्रकिशोर मीना, महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी के उपाध्यक्ष एवं कार्यकारी निदेशक दीपक कपूर, जेएनपीए के अध्यक्ष गौरव दयाल, मीरा-भाईंदर–वसई–विरार पुलिस आयुक्त निकेत कौशिक, पालघर की जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज रानडे, पुलिस अधीक्षक यतीश देशमुख, डहाणू परियोजना अधिकारी विशाल खत्री तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे परियोजना न केवल परिवहन व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी, बल्कि औद्योगिक विकास, व्यापार, निवेश, निर्यात और रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी तथा भारत की आर्थिक प्रगति को नई दिशा प्रदान करेगी।

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