पालघर: विकसित महाराष्ट्र 2047 के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को बड़ी मजबूती, नांदोर में 500 बेड का मेडिकल कॉलेज मंजूर।
पालघर: विकसित महाराष्ट्र 2047 के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को बड़ी मजबूती, नांदोर में 500 बेड का मेडिकल कॉलेज मंजूर।
अखिलेश चौबे
पालघर। जिले में ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। ‘विकसित महाराष्ट्र 2047’ के लक्ष्य के अनुरूप पालघर में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, चिकित्सा शिक्षा के विकास और आधुनिक सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा की गई है। इन योजनाओं के लागू होने से जिले में प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है।
सबसे अहम घोषणा के तहत पालघर जिले के नांदोर में जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (JICA) के आर्थिक सहयोग से 500 खाटों वाला अत्याधुनिक शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना का प्रस्ताव उच्चस्तरीय समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है और इसे जिले के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। यह संस्थान शुरू होने के बाद न केवल पालघर बल्कि आसपास के जिलों के नागरिकों को भी उच्चस्तरीय चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होंगी, साथ ही यह उत्तर कोकण क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनेगा।
इसी क्रम में हेल्थ यूनिट पालघर (ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र), जो ग्रांट गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और सर जे.जे. समूह अस्पताल, मुंबई से संबद्ध है, वहां क्लिनिकल सेवाओं के विस्तार की योजना तैयार की गई है। इस पहल के तहत ग्रामीण अस्पताल के माध्यम से आपातकालीन प्रसूति सेवाएं, नवजात शिशु उपचार, नियोजित एवं आपातकालीन सर्जरी और बाल रोग उपचार जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के मरीजों को महानगरों तक जाने की आवश्यकता कम होगी।
सेवाओं को और प्रभावी बनाने के लिए जिला रेसिडेंसी कार्यक्रम के तहत स्नातकोत्तर निवासी डॉक्टरों की नियुक्ति की जा रही है। इसके अलावा सर्जरी, स्त्रीरोग, प्रसूति विज्ञान, बाल रोग और एनेस्थीसिया विभागों में पूर्णकालिक वरिष्ठ डॉक्टरों की भी नियुक्ति प्रस्तावित है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में व्यापक सुधार आएगा।
हेल्थ यूनिट पालघर में सर जे.जे. अस्पताल के सहयोग से एक स्वतंत्र ऑपरेशन थिएटर स्थापित करने का भी प्रस्ताव है। इस सुविधा के अंतर्गत मोतियाबिंद, हर्निया, हाइड्रोसील, लिपोमा, सिस्ट तथा चयनित अस्थि रोगों की सर्जरी की जाएगी। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम नियमित रूप से यहां आकर स्थानीय चिकित्सा स्टाफ के साथ मिलकर सेवाएं प्रदान करेगी।
इसके साथ ही जिले में व्यापक स्तर पर सामुदायिक स्वास्थ्य अभियान भी चलाया जाएगा। इस अभियान में आंगनवाड़ी बच्चों की स्वास्थ्य जांच, रक्ताल्पता की पहचान, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, उच्च जोखिम गर्भधारण की पहचान, आदिवासी क्षेत्रों में सिकल सेल रोग की जांच तथा स्कूल और आश्रमशालाओं में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों के माध्यम से निवारक और सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
प्रशासन द्वारा तैयार ‘विकसित महाराष्ट्र 2047’ स्वास्थ्य आराखड़ा 2026-27 से 2029-30 तक चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसमें विभिन्न वित्तीय स्रोतों जैसे राज्य सरकार, DPDC, JICA, महात्मा ज्योतिराव फुले जनआरोग्य योजना, मुख्यमंत्री सहायता निधि और CSR भागीदारी को शामिल किया गया है।
इन सभी योजनाओं को जिले के स्वास्थ्य क्षेत्र में अब तक के सबसे बड़े सुधारों में से एक माना जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य है कि हर नागरिक, विशेषकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले लोग, सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और संतुलित स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकें।
यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देगी, बल्कि ‘विकसित महाराष्ट्र 2047’ के विजन को भी जमीनी स्तर पर साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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