पालघर: मनोर को तालुका बनाने की मांग तेज, ग्रामीणों को मिलेगा प्रशासनिक राहत का रास्ता।
पालघर: मनोर को तालुका बनाने की मांग तेज, ग्रामीणों को मिलेगा प्रशासनिक राहत का रास्ता।
अखिलेश चौबे
पालघर। जिले के पूर्वी भाग में स्थित अत्यंत व्यस्त कस्बा मनोर को तालुका का दर्जा दिए जाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। आम नागरिकों की सुविधा और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के समुचित विकास को ध्यान में रखते हुए यह मांग उठाई गई है। इस संबंध में भाजपा के महाराष्ट्र प्रदेश सचिव संतोष आनंदी शिवराम जनाठे ने राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को निवेदन सौंपा है।
निवेदन में बताया गया है कि मनोर कस्बा न केवल एक प्रमुख राज्यमार्ग से जुड़ा हुआ है, बल्कि यह आसपास के सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों के सौ से अधिक गांवों के लिए एक केंद्रीय स्थान के रूप में कार्य करता है। इन गांवों में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय निवास करता है, जिनकी आजीविका मुख्यतः कृषि और कृषि श्रम पर निर्भर है।
वर्तमान में पालघर जिला आठ तालुकाओं—पालघर, डहाणू, जव्हार, तलासरी, मोखाडा, विक्रमगढ़, वाडा और वसई—में विभाजित है। ऐसे में इन दूरदराज के गांवों के निवासियों को प्रशासनिक कार्यों के लिए पालघर तालुका मुख्यालय तक पहुंचने में कई घंटों का लंबा और कठिन सफर तय करना पड़ता है, जिससे समय और संसाधनों की भारी बर्बादी होती है।
निवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि मनोर को तालुका का दर्जा प्रदान किया जाता है, तो इससे न केवल प्रशासनिक सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी, बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास को भी गति मिलेगी। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व और अन्य शासकीय सुविधाओं तक आम नागरिकों की पहुंच आसान हो सकेगी।
जनाठे ने राज्य सरकार से इस मांग पर गंभीरतापूर्वक विचार करने का आग्रह किया है, ताकि आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को राहत मिल सके और उन्हें बुनियादी सुविधाएं अपने ही क्षेत्र में प्राप्त हो सकें।
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