मुंबई: महाराष्ट्र में बढ़ रहा श्वसन रोगों का खतरा, विशेषज्ञों ने समय पर पहचान और रोकथाम पर दिया जोर।
मुंबई: महाराष्ट्र में बढ़ रहा श्वसन रोगों का खतरा, विशेषज्ञों ने समय पर पहचान और रोकथाम पर दिया जोर।
अखिलेश चौबे
मुंबई। विश्व अस्थमा दिवस के अवसर पर मुंबई के श्वसन रोग विशेषज्ञों ने महानगर में अस्थमा और अन्य दीर्घकालिक श्वसन बीमारियों के तेजी से बढ़ते मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि बढ़ते वायु प्रदूषण, बदलती जीवनशैली और जागरूकता की कमी के कारण स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। उन्होंने समय पर निदान, नियमित उपचार और रोकथाम के उपायों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
विशेषज्ञों के अनुसार मुंबई में वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल और मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के कारण वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है। इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है और सभी आयु वर्ग में श्वसन संबंधी रोगों के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। प्रदूषित हवा अस्थमा का प्रमुख कारण बनती है, जिससे सांस लेने में कठिनाई, सीटी जैसी आवाज, सीने में जकड़न और लगातार खांसी जैसी समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं।
Wockhardt Hospitals, मीरा रोड की कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. संगिता चेकर ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में अस्थमा के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। उन्होंने बताया कि प्रदूषण और अस्वस्थ जीवनशैली इसके प्रमुख कारण हैं। कई मरीज शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर हो जाती है। उनका कहना है कि अस्थमा पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता, लेकिन उचित उपचार, नियमित निगरानी और ट्रिगर्स से बचाव के माध्यम से इसे प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।
इसी संदर्भ में Apex Group of Hospitals के चेस्ट फिजिशियन डॉ. पार्थिव शाह ने कहा कि अब केवल इलाज पर निर्भर रहने के बजाय रोकथाम पर ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि अस्थमा अचानक नहीं होता, बल्कि पहले छोटे-छोटे संकेत देता है, जैसे नींद में बाधा, सहनशक्ति में कमी और बार-बार गले में जलन। इन संकेतों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि समय रहते इनकी पहचान बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ सरल सावधानियां अपनाकर अस्थमा के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इनमें प्रदूषित क्षेत्रों में मास्क का उपयोग, घर के अंदर स्वच्छ हवा बनाए रखना, डॉक्टर द्वारा सुझाई गई इनहेलर थेरेपी का नियमित पालन और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच शामिल हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई है, क्योंकि वे प्रदूषण के प्रभाव के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
इस अवसर पर नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपने फेफड़ों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें, शुरुआती लक्षणों को पहचानें और किसी भी समस्या की स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और श्वसन रोगों के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए व्यक्तिगत स्तर के साथ-साथ नीतिगत स्तर पर भी ठोस कदम उठाना आवश्यक है।
अस्थमा के सामान्य लक्षण: सांस लेने में तकलीफ, सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज (व्हीजिंग), सीने में जकड़न, बार-बार खांसी, विशेषकर रात या सुबह के समय विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जागरूकता और सतर्कता ही अस्थमा जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
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