पालघर: अत्याचार प्रकरण; पीड़िता को न्याय दिलाने तक जारी रहेगा प्रयास, आरोपी को जमानत न देने की मांग।
पालघर: अत्याचार प्रकरण; पीड़िता को न्याय दिलाने तक जारी रहेगा प्रयास, आरोपी को जमानत न देने की मांग।
अखिलेश चौबे
पालघर। जिले के कासा पुलिस थाना क्षेत्र में एक नाबालिग आदिवासी बालिका के साथ कथित ‘भोंदू बाबा’ द्वारा किए गए यौन उत्पीड़न के मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। इस प्रकरण को लेकर डॉ. नीलम गोऱ्हे ने पीड़िता और उसके परिजनों से मुलाकात कर उनकी स्थिति का जायजा लिया और न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करने का आश्वासन दिया।
डॉ. गोऱ्हे ने स्पष्ट कहा कि इस अत्यंत गरीब और कमजोर परिवार की एकमात्र मांग न्याय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आरोपी को किसी भी परिस्थिति में जमानत नहीं मिलनी चाहिए और न्यायिक प्रक्रिया को तेजी से पूरा कराने के लिए पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा।
उन्होंने पीड़िता के भविष्य को विशेष महत्व देते हुए कहा कि बालिका ने आगे पढ़ाई कर पुलिस अधिकारी बनने की इच्छा जताई है। शासन की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उसके शिक्षा और करियर को हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।
इस दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति इस मामले में दबाव बनाने, साक्षियों को प्रभावित करने या आरोपी की मदद करने की कोशिश करेगा, तो उसके विरुद्ध भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. गोऱ्हे ने कहा कि मामले को मजबूत बनाने के लिए डीएनए जांच सहित सभी वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए जाएंगे। साथ ही साक्षी संरक्षण कानून का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार का दबाव न बने। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शिवसेना के पदाधिकारी और महिला आघाड़ी की कार्यकर्ता पीड़ित परिवार के साथ लगातार खड़े रहेंगे।
भेंट के दौरान डॉ. गोऱ्हे ने एकनाथ शिंदे से दूरभाष पर संपर्क कर पूरी स्थिति की जानकारी दी। इस दौरान उपमुख्यमंत्री ने पीड़िता, उसकी माता और बहन से बात कर उन्हें सांत्वना दी और आश्वस्त किया कि सरकार पूरी मजबूती से उनके साथ खड़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, शिवसेना की ओर से पीड़िता की संपूर्ण शिक्षा की जिम्मेदारी भी लेने की बात कही गई।
प्रशासन को दिए गए निर्देशों के अनुसार पीड़िता को ‘मनोधैर्य’ योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता, पुलिस सुरक्षा, चिकित्सकीय उपचार तथा मनोवैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा बाल संरक्षण, आदिवासी विकास विभाग की योजनाओं और एकल महिलाओं के लिए संचालित योजनाओं का लाभ भी दिलाया जाएगा।
डॉ. गोऱ्हे ने अंधविश्वास और भोंदूगिरी के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि तंत्र-मंत्र के नाम पर लोगों को ठगने और अपराध करने वालों पर कड़ी कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने महाराष्ट्र के जादूटोना विरोधी कानून और पॉक्सो कानून के तहत कठोर धाराएं लगाने की मांग की।
महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने फास्ट ट्रैक अदालतों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता भी जताई। उन्होंने बताया कि अपेक्षित 138 अदालतों के मुकाबले वर्तमान में केवल 40 ही कार्यरत हैं, ऐसे में शेष अदालतों को शीघ्र शुरू करने के लिए राज्य नेतृत्व से आग्रह किया जाएगा।
इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें मामले की जांच की प्रगति, साक्ष्य संकलन और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई। साथ ही आदिवासी क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, जनजागरूकता अभियान और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।
इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण तथा शिवसेना के पदाधिकारी और महिला आघाड़ी की कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
डॉ. गोऱ्हे ने अंत में दोहराया कि पीड़िता को न्याय दिलाने तक यह संघर्ष लगातार जारी रहेगा और किसी भी स्थिति में आरोपी को बचने नहीं दिया जाएगा।
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