रायगढ़-अलीबाग: मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना का लोकार्पण, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत।‘मिसिंग लिंक’ नहीं, ‘कनेक्टिंग लिंक’ — देवेंद्र फडणवीस।
रायगढ़-अलीबाग: मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना का लोकार्पण, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत।
‘मिसिंग लिंक’ नहीं, ‘कनेक्टिंग लिंक’ — देवेंद्र फडणवीस।
अखिलेश चौबे
रायगढ़-अलीबाग। मुंबई–पुणे द्रुतगति मार्ग पर बहुप्रतीक्षित ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना का लोकार्पण करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे भारतीय इंजीनियरिंग कौशल का वैश्विक स्तर पर उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल एक सड़क नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने वाला एक महत्वपूर्ण “इकोनॉमिक मल्टीप्लायर” है, जिससे करीब 70 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
लोकार्पण के बाद आयोजित पत्रकार परिषद में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इस परियोजना को ‘मिसिंग लिंक’ के बजाय ‘कनेक्टिंग लिंक’ कहना अधिक उचित है, क्योंकि यह मुंबई और पुणे के बीच संपर्क को और अधिक सुगम, सुरक्षित और तेज बनाती है। उन्होंने परियोजना की तकनीकी विशेषताओं और सुरक्षा उपायों पर विस्तार से जानकारी दी।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार की प्रमुख उपस्थिति रही। कार्यक्रम में सार्वजनिक बांधकाम मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले, महिला व बाल विकास मंत्री आदित तटकरे, रोजगार हमी मंत्री भरतशेठ गोगावले, राज्यमंत्री मेघना साकोरे-बोर्डिकर, सांसद सुनील तटकरे, सांसद श्रीरंग बारणे, गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा म्हैसकर पाटणकर, सार्वजनिक बांधकाम विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मिलिंद म्हैसकर, विभागीय आयुक्त रुबल अग्रवाल, विशेष पुलिस महानिरीक्षक कोकण परिक्षेत्र डॉ. संजय दराडे, जिलाधिकारी किशन जावळे, एमएसआरडीसी के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक अनिल गायकवाड, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नेहा भोसले, पुलिस अधीक्षक आचल दलाल, सह-प्रबंध निदेशक राजेश पाटील, एमएसआरडीसी के अन्य अधिकारी तथा नवयुगा कंपनी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि इस परियोजना में यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसमें अत्याधुनिक अग्निशमन प्रणाली, वॉटर मिस्ट सिस्टम, हर 50 मीटर पर आपातकालीन टेलीफोन तथा हर 300 मीटर पर दोनों सुरंगों को जोड़ने वाले कनेक्टर्स बनाए गए हैं, ताकि किसी आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा पूरे मार्ग पर 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी और ‘इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम’ लागू किया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों को सीधे उनके घर ई-चालान भेजे जाएंगे।
उन्होंने बताया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, घाटों और जंगलों के बीच इस परियोजना को पूरा करना एक बड़ी चुनौती थी। इसमें सात देशों की विशेषज्ञ संस्थाओं और कंपनियों का योगदान रहा है। कोविड-19 महामारी के दौरान आई बाधाओं के बावजूद महायुति सरकार ने इस परियोजना को गति दी और लगभग 7,181 करोड़ रुपये की लागत से इसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
इस परियोजना से खोपोली से कुसगांव के बीच की दूरी लगभग 6 किलोमीटर कम हो जाएगी, जिससे यात्रियों का 25 से 30 मिनट का समय बचेगा। मुख्यमंत्री ने उंबरखिंडी के ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी क्षेत्र में छत्रपति शिवाजी महाराज के मावलों ने मुगलों को पराजित किया था।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सांसद सुप्रिया सुळे द्वारा मुंबई–पुणे मार्ग पर ट्रैफिक जाम को लेकर साझा किए गए वीडियो का उल्लेख करते हुए उनसे और नागरिकों से खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “अब ‘मिसिंग लिंक’ शुरू होने के बाद घाट में ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।”
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने संबोधन में कहा कि यह परियोजना सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। कोविड काल जैसी चुनौतियों के बावजूद एमएसआरडीसी और सार्वजनिक बांधकाम विभाग के अधिकारियों ने उल्लेखनीय कार्य किया। उन्होंने कहा कि एक समय इस परियोजना को रद्द करने की स्थिति बन गई थी, लेकिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में इसे पुनः गति दी गई। उन्होंने यह भी बताया कि भूमिपूजन के समय वे स्वयं एमएसआरडीसी मंत्री थे और लोकार्पण के समय भी यह विभाग उनके पास है, जो एक विशेष संयोग है।
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने अपने संबोधन में कहा कि इस परियोजना के अंतर्गत निर्मित 23.5 मीटर चौड़ी सुरंग विश्व की सबसे चौड़ी सुरंगों में शामिल है और इसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज होने की प्रक्रिया में है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल दो शहरों को जोड़ने का कार्य नहीं करती, बल्कि महाराष्ट्र के विकास की नई दिशा तय करती है। उन्होंने पूर्व उपमुख्यमंत्री स्वर्गीय अजित पवार के योगदान का भी उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना से घाट के खतरनाक मोड़ों से बचाव होगा, जिससे ईंधन की बचत होगी और प्रतिदिन लगभग 1 करोड़ रुपये की आर्थिक बचत संभव होगी। इससे प्रदूषण में कमी आएगी और सड़क सुरक्षा में भी सुधार होगा।
मुंबई–पुणे यशवंतराव चव्हाण द्रुतगति मार्ग को वर्ष 2002 में चरणबद्ध तरीके से यातायात के लिए खोला गया था। हालांकि 1996-97 में इसकी योजना बनाते समय खालापुर से कुसगांव (सिंहगड इंस्टिट्यूट) के बीच 13.30 किलोमीटर लंबा ‘मिसिंग लिंक’ प्रस्तावित था, लेकिन तकनीकी और आर्थिक कारणों से इसे उस समय पूरा नहीं किया जा सका। इसके कारण राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 4 के लगभग 19 किलोमीटर हिस्से का उपयोग साझा मार्ग के रूप में किया जा रहा था।
वर्तमान में इस समस्या के समाधान के लिए ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना के तहत खालापुर से खोपोली इंटरचेंज तक 5.86 किलोमीटर लंबे मार्ग को छह लेन से आठ लेन में विस्तारित किया गया है। वहीं खोपोली से कुसगांव सिंहगड इंस्टिट्यूट तक 12.30 किलोमीटर के हिस्से में दो सुरंगों और दो वायाडक्ट का निर्माण किया गया है। कुल मिलाकर 19.16 किलोमीटर लंबा यह अत्याधुनिक मार्ग तैयार किया गया है।
इस परियोजना के अंतर्गत न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) तकनीक से दो सुरंगों का निर्माण किया गया है, जिनकी चौड़ाई 23.50 मीटर है। इनमें से पहली सुरंग की लंबाई 1.58 किलोमीटर और दूसरी की लंबाई 8.86 किलोमीटर है। दूसरी सुरंग लोणावला झील के स्तर से लगभग 180 मीटर नीचे स्थित है।
इसके अलावा टाइगर वैली में 650 मीटर लंबा केबल-स्टेड ब्रिज बनाया गया है, जिसकी ऊंचाई लगभग 125 मीटर है। इस पुल के निर्माण में 182 मीटर ऊंचे दो पाइलॉन और 240 केबल्स का उपयोग किया गया है। इस पुल पर विंड टनल टेस्ट, फटीग और टेंसाइल टेस्ट जैसे उन्नत परीक्षण किए गए हैं।
इस परियोजना के पूर्ण होने से मुंबई–पुणे मार्ग पर यातायात अधिक सुगम, तेज और सुरक्षित हो जाएगा। साथ ही यह परियोजना पश्चिम महाराष्ट्र, कोकण और मराठवाड़ा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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