पालघर: वाढवण बंदर भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में पारदर्शिता पर प्रशासन का जोर।मुआवजा दर और जांच प्रक्रिया पर दिया स्पष्टीकरण।
पालघर: वाढवण बंदर भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में पारदर्शिता पर प्रशासन का जोर।
मुआवजा दर और जांच प्रक्रिया पर दिया स्पष्टीकरण।
अखिलेश चौबे
पालघर। जिले में प्रस्तावित वाढवण बंदर परियोजना से जुड़ी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिए जिला प्रशासन ने स्पष्ट रुख अपनाया है। जिलाधिकारी डॉ. इंदू रानी जाखड़ ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता, निष्पक्षता और न्यायपूर्ण मूल्यांकन के सिद्धांतों पर आधारित है तथा भूमि धारकों की शिकायतों का सीधे समाधान किया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने बताया कि पेड़ों और अन्य संपत्तियों के मूल्यांकन को लेकर उठे सवालों के मद्देनजर कृषि और वन विभाग को मौके पर जाकर विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं, लेकिन अब तक पेड़ों या अन्य संपत्तियों के लिए किसी भी प्रकार का मुआवजा वितरित नहीं किया गया है। पूरी प्रक्रिया की गहन जांच की जा रही है ताकि किसी प्रकार की धोखाधड़ी न हो सके।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि 17 फरवरी को निर्धारित किए गए भूमि अधिग्रहण दर अंतिम हैं और इन्हें सरकारी नियमों के अनुसार तय किया गया है। वरूर और चिंचणी सहित छह गांवों के लिए दर 4.5 से 5 लाख रुपये प्रति गुंठा तय किया गया है, जबकि अन्य 18 गांवों के लिए कृषि भूमि का दर लगभग 2.5 लाख रुपये प्रति गुंठा निर्धारित किया गया है। इन दरों में किसी प्रकार का बदलाव संभव नहीं है।
हालांकि, यदि कोई भूमि धारक इन दरों से असंतुष्ट है, तो वह “हरकतीखाली” (अंडर प्रोटेस्ट) मुआवजा स्वीकार कर सकता है और बाद में मध्यस्थ, यानी अतिरिक्त जिलाधिकारी पालघर के समक्ष अपील कर सकता है।
अब तक लगभग 240 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया जा चुका है। कुछ मामलों में पारिवारिक विवादों के कारण दावे लंबित हैं। इसे देखते हुए प्रशासन ने जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण (JNPA) से स्वैच्छिक अधिग्रहण की अंतिम तिथि 30 अप्रैल से आगे बढ़ाने का अनुरोध कर उसे स्वीकृति दिलाई है।
भूमि अभिलेखों को अद्यतन करने के लिए विशेष राजस्व शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। साथ ही ‘गोला सर्वे’ भूमि का मैपिंग मात्र 200 रुपये शुल्क में उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे भूमि मालिकों को अपने अधिकारों का दावा करने में सुविधा मिल सके।
जिलाधिकारी ने कुछ संगठनों द्वारा फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे भूमि धारकों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है और उन्हें उचित मुआवजा मिलने में बाधा आ रही है। प्रशासन ने नागरिकों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने के लिए ईमेल सुविधा शुरू की है तथा जिलाधिकारी से व्यक्तिगत मुलाकात के लिए समय भी निर्धारित किया गया है।
जिलाधिकारी डॉ. इंदू रानी जाखड़ ने कहा, “पूरी प्रक्रिया को अत्यंत पारदर्शिता के साथ संचालित किया जा रहा है। यदि कोई अधिकारी अनियमितता में दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। भूमि धारकों से अपील है कि वे अपने दस्तावेज सुरक्षित रूप से प्रस्तुत करें और अफवाहों से दूर रहें।”
प्रशासन ने दोहराया कि भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर निष्पक्ष रूप से पूरी की जाएगी, ताकि सभी प्रभावितों को न्याय मिल सके।
Comments
Post a Comment