मुंबई: नौतपा में बढ़ा खतरा; भीषण गर्मी से बच्चों को बचाने की डॉक्टरों की चेतावनी।

मुंबई: नौतपा में बढ़ा खतरा; भीषण गर्मी से बच्चों को बचाने की डॉक्टरों की चेतावनी।

अखिलेश चौबे 
मुंबई। देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है और कई क्षेत्रों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने “नौतपा” (25 मई से 2 जून) के दौरान शिशुओं और छोटे बच्चों की विशेष देखभाल करने की सलाह दी है। डॉक्टरों के अनुसार, अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आने से बच्चों में डिहाइड्रेशन, हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ जाता है, खासकर नवजात और 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में।
हीटवेव के कारण देशभर में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। कई शहरों में पानी की कमी, बिजली कटौती और हीट स्ट्रोक के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। मिरा रोड स्थित वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स के विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे बच्चों का शरीर तापमान को नियंत्रित करने में वयस्कों की तुलना में कम सक्षम होता है, जिससे वे गर्मी से होने वाली बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि बच्चों में हीट से जुड़ी समस्याओं के सामान्य लक्षणों में अत्यधिक पसीना आना, चिड़चिड़ापन, होंठ सूखना, पेशाब कम होना, उल्टी, चक्कर आना, अधिक नींद आना, तेज सांस चलना और शरीर का तापमान बढ़ना शामिल हैं।
डॉ. नीतू मुंधरा ने कहा, “भीषण गर्मी के दौरान शिशु और छोटे बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। इस मौसम में उन्हें बार-बार तरल पदार्थ देना बेहद जरूरी है, क्योंकि छोटे बच्चे अपनी प्यास व्यक्त नहीं कर पाते। स्तनपान कराने वाली माताओं को बच्चों को अधिक बार फीड कराना चाहिए, क्योंकि मां का दूध पोषण के साथ शरीर में पानी की कमी को भी पूरा करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।”
उन्होंने आगे कहा कि यदि बच्चे में बुखार, सुस्ती, उल्टी, दूध या भोजन कम लेना या डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
डॉक्टरों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों को दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच घर से बाहर न ले जाएं। साथ ही उन्हें ठंडी और हवादार जगह पर रखें, हल्के रंग और ढीले सूती कपड़े पहनाएं तथा नियमित रूप से पानी और अन्य तरल पदार्थ देते रहें।
हीट स्ट्रोक के चेतावनी संकेत: तेज बुखार, त्वचा का सूखा, लाल और गर्म होना, चक्कर आना, भ्रम या अत्यधिक सुस्ती, तेज सांस चलना या अनियमित धड़कन, बार-बार उल्टी होना या पानी पीने से इनकार करना।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, समय पर देखभाल और आवश्यक सावधानियां अपनाकर ही भीषण गर्मी के दौरान बच्चों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

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