पालघर: गणेश नाईक बोले—सातपाटी बंदर का विकास जिले के आर्थिक परिवर्तन की मजबूत नींव।नितेश राणे का ऐलान—350 करोड़ की लागत से 24 महीनों में तैयार होगा आधुनिक मत्स्य बंदर।
पालघर: गणेश नाईक बोले—सातपाटी बंदर का विकास जिले के आर्थिक परिवर्तन की मजबूत नींव।
नितेश राणे का ऐलान—350 करोड़ की लागत से 24 महीनों में तैयार होगा आधुनिक मत्स्य बंदर।
अखिलेश चौबे
पालघर। जिले के प्रमुख मछली पकड़ने वाले केंद्र सातपाटी में लगभग 350 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक मत्स्य बंदर विकास परियोजना का भूमिपूजन समारोह उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर वन मंत्री तथा पालघर जिले के पालकमंत्री गणेश नाईक ने कहा कि सातपाटी बंदर का विकास केवल एक आधारभूत परियोजना नहीं, बल्कि पूरे जिले के आर्थिक परिवर्तन की मजबूत नींव साबित होगा।
महाराष्ट्र शासन और महाराष्ट्र सागरी मंडल के माध्यम से इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अमल में लाया जा रहा है। कार्यक्रम में मत्स्यव्यवसाय और बंदरगाह मंत्री नितेश राणे ने विश्वास जताया कि इस परियोजना से पारंपरिक मछुआरों को आधुनिक सुविधाएं, सुरक्षित नौकायन और आर्थिक मजबूती प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट क्षेत्र के मछुआरों के लिए समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगा।
भूमिपूजन समारोह में सांसद डॉ. हेमंत सवरा, विधायक राजेंद्र गावित, विधायक मनिषा चौधरी, विधायक राजन नाईक, विधायक विलास तरे, जिलाधिकारी डॉ. इंदु राणी जाखड़, मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज रानडे, पुलिस अधीक्षक यतीश देशमुख, उपवनसंरक्षक दिवाकर निरंजन, जिला परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश निकम तथा सातपाटी की सरपंच सीमा भोईर सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी, मछुआरा संगठनों के पदाधिकारी और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
गणेश नाईक ने अपने संबोधन में कहा कि इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद सातपाटी का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा और भविष्य में यह क्षेत्र नगरपालिका स्तर तक विकसित हो सकता है। उन्होंने वधवन बंदरगाह परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार भूमिपुत्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
छुआरों की समस्याओं पर बात करते हुए गणेश नाईक ने कहा कि समुद्र में 10 से 15 दिनों तक जोखिम उठाकर मछली पकड़ने वाले पारंपरिक मछुआरों की कठिनाइयों को सरकार समझती है। उन्होंने कहा कि कई बार उन्हें डीजल का खर्च भी नहीं निकल पाता, इसलिए उन्हें सशक्त बनाना सरकार की जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने बारिश के मौसम में खराब होने वाली सूखी मछलियों के नुकसान को लेकर भी सरकार के सकारात्मक रुख की जानकारी दी।
मत्स्यव्यवसाय मंत्री नितेश राणे ने इस परियोजना को पारंपरिक मछुआरों की आर्थिक समृद्धि का आधार बताते हुए कहा कि 24 महीनों के भीतर इस कार्य को पूरा कर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों इसका उद्घाटन कराया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि कार्य समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए, किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नितेश राणे ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा मत्स्य व्यवसाय को कृषि का दर्जा देना एक ऐतिहासिक निर्णय है, जिससे मछुआरों को किसान क्रेडिट कार्ड, मुआवजा और विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के मत्स्यव्यवसाय विभाग का बजट 212 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1240 करोड़ रुपये कर दिया गया है और मुख्यमंत्री मत्स्यसंपदा योजना मछुआरों के लिए बड़ा सहारा साबित होगी।
एलईडी आधारित अवैध मछली पकड़ने के खिलाफ सख्त कार्रवाई का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार पारंपरिक मछुआरों के हितों के खिलाफ जाने वालों को संरक्षण नहीं देगी। ड्रोन के माध्यम से निगरानी कर अब तक हजार से अधिक नौकाओं पर कार्रवाई की जा चुकी है। उन्होंने मछुआरा संगठनों से अपील की कि वे एलईडी मछली पकड़ने वालों को डीजल आपूर्ति बंद करें।
सातपाटी खाड़ी में जमा गाद के कारण नौकायन और मछली पकड़ने में आ रही समस्याओं को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना के तहत बंदरगाह का गहरीकरण, आधुनिक जेट्टी, मछली प्रसंस्करण सुविधाएं और पर्यटन विकास से जुड़े कार्य किए जाएंगे। इससे पालघर के तटीय क्षेत्र में मत्स्य व्यवसाय को नई गति मिलने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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