पालघर: त्वरित कार्रवाई से बची युवक की जान, खाकी वर्दी ने निभाया मानवता का धर्म।

पालघर: त्वरित कार्रवाई से बची युवक की जान, खाकी वर्दी ने निभाया मानवता का धर्म।

अखिलेश चौबे
पालघर। जिले के बोईसर औद्योगिक क्षेत्र में घटी एक घटना ने यह सिद्ध कर दिया कि जब कर्तव्यनिष्ठा और संवेदनशीलता एक साथ कार्य करती हैं, तो असंभव भी संभव हो जाता है। आपातकालीन सेवा ‘डायल 112’ की तत्परता और पुलिस की सूझबूझ से एक 26 वर्षीय युवक को समय रहते उपचार मिल सका और उसकी जान बच गई।
19 अप्रैल 2026 की सायंकाल लगभग 5 बजकर 30 मिनट पर डायल 112 नियंत्रण कक्ष को एक आपात सूचना प्राप्त हुई। सूचना में बताया गया कि बोईसर औद्योगिक क्षेत्र के एक भूखंड के समीप भीषण सड़क दुर्घटना हुई है, जिसमें एक दोपहिया वाहन चालक गंभीर रूप से घायल अवस्था में सड़क पर पड़ा हुआ है। सूचना मिलते ही पुलिस हवलदार संदीप कदम बिना विलंब किए घटनास्थल की ओर रवाना हो गए। त्वरित प्रतिक्रिया का परिचय देते हुए वे मात्र 6 मिनट के भीतर मौके पर पहुंच गए।
घटनास्थल पर पहुंचने पर स्थिति अत्यंत गंभीर थी। युवक अचेत अवस्था में था और उसके सिर से निरंतर रक्तस्राव हो रहा था। परिस्थिति की गंभीरता को समझते हुए हवलदार संदीप कदम ने तत्काल निर्णय लेते हुए एम्बुलेंस की प्रतीक्षा करना उचित नहीं समझा। उन्होंने तत्काल एक निजी वाहन की व्यवस्था की और घायल युवक को शीघ्रता से समीपस्थ अस्पताल पहुंचाया। मात्र 15 मिनट के भीतर युवक को चिकित्सालय में भर्ती करा दिया गया।
चिकित्सकों के अनुसार, दुर्घटना के पश्चात का प्रारंभिक समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, जिसे ‘स्वर्णिम समय’ कहा जाता है। यदि इस अवधि में उचित उपचार मिल जाए, तो गंभीर से गंभीर स्थिति में भी जीवन बचाया जा सकता है। चिकित्सकों ने बताया कि युवक की स्थिति अत्यंत नाजुक थी, परंतु पुलिस द्वारा समय पर अस्पताल पहुंचाए जाने के कारण उसका अत्यधिक रक्तस्राव रोका जा सका और उसकी जान बचाई जा सकी। यदि कुछ मिनटों की भी देरी होती, तो परिणाम अत्यंत गंभीर हो सकते थे।
घायल युवक की पहचान रितेश यादव (26 वर्ष) के रूप में हुई है। दुर्घटना में उसके सिर में गंभीर चोट आई, जिसके कारण उसे 15 टांके लगाने पड़े, वहीं उसके हाथ में भी अस्थिभंग (फ्रैक्चर) हुआ है। प्राथमिक उपचार के उपरांत उसे बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए दहानू स्थित एक अस्पताल में स्थानांतरित किया गया, जहां वर्तमान में उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
अपने पुत्र के सुरक्षित होने पर रितेश के पिता ने भावुक होकर पुलिस प्रशासन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों ने उनके लिए देवदूत के समान कार्य किया है। यदि समय पर सहायता नहीं मिलती, तो उनका परिवार गहरे संकट में पड़ सकता था।
इस घटना के उपरांत पुलिस निरीक्षक सुनील जाधव ने नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत ‘112’ पर संपर्क करें। यह सेवा चौबीसों घंटे नागरिकों की सहायता के लिए उपलब्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकों की सतर्कता और पुलिस की तत्परता मिलकर अनेक अमूल्य जीवन बचा सकती है।
यह घटना स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि जब समाज और पुलिस के बीच समन्वय स्थापित होता है, तो आपातकालीन सेवाओं का प्रभाव अत्यंत प्रभावी हो जाता है और अनेक जिंदगियां सुरक्षित की जा सकती हैं।

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