मुंबई: मुख्यमंत्री सहायता निधि का डिजिटल रूपांतरण: मरीजों, अस्पतालों और शासन को जोड़ने वाला नया प्लेटफॉर्म लॉन्च, वॉर रूम भी स्थापित होगी।
मुंबई: मुख्यमंत्री सहायता निधि का डिजिटल रूपांतरण: मरीजों, अस्पतालों और शासन को जोड़ने वाला नया प्लेटफॉर्म लॉन्च, वॉर रूम भी स्थापित होगी।
अखिलेश चौबे
मुंबई। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री वैद्यकीय सहायता निधि कक्ष के लिए विकसित नई ऑनलाइन प्रणाली का लोकार्पण किया। इस पहल के तहत राज्य में संचालित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं का एकीकरण किया जाएगा और पहली बार एक केंद्रीकृत “वॉर रूम” भी स्थापित की जाएगी, जो पूरे सिस्टम की रियल-टाइम निगरानी करेगी।
मुंबई स्थित सह्याद्री अतिथि गृह में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नई व्यवस्था केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मरीजों, अस्पतालों और शासन के बीच समन्वय स्थापित करने वाला एक प्रभावी मंच बनेगी। इससे जरूरतमंद मरीजों को समय पर और सही सहायता मिल सकेगी।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सहायता निधि व धर्मादाय अस्पताल सहायता कक्ष के प्रमुख रामेश्वर नाईक ने प्रस्तुति के माध्यम से नई प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह पेपरलेस हो जाएगी और मरीजों को उनकी आवेदन स्थिति की जानकारी एसएमएस और लिंक के जरिए रियल-टाइम में मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से कैंसर उपचार में उपयोग होने वाली इम्यूनोथेरेपी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह उपचार अत्यंत महंगा है और आम नागरिकों की पहुंच से बाहर है। एक इंजेक्शन की कीमत लगभग दो लाख रुपये और कुल उपचार खर्च करीब आठ लाख रुपये तक पहुंचता है। उन्होंने निर्देश दिया कि ऐसी महंगी उपचार पद्धतियों का लाभ राज्य के जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाने के लिए विशेष योजना बनाई जाए। साथ ही, योजनाओं के एकीकरण से दोहरे लाभ को रोका जा सकेगा, जिससे वास्तविक जरूरतमंदों को अधिक सहायता मिल सकेगी।
रियल-टाइम आवेदन ट्रैकिंग: मरीजों को आवेदन की स्थिति की जानकारी मोबाइल पर तुरंत मिलेगी।, चरणबद्ध निधि वितरण: मंजूरी के बाद 30% राशि तुरंत और शेष 70% अंतिम स्वीकृति के बाद जारी होगी।, वॉर रूम मॉनिटरिंग: मंत्रालय स्तर पर लगातार निगरानी और तेज निर्णय प्रक्रिया सुनिश्चित होगी।, त्वरित मंजूरी: आर्थिक सहायता को केवल 8 कार्यकारी घंटों में स्वीकृति देने का प्रावधान।, पेपरलेस प्रक्रिया: पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से, बिना किसी कागजी कार्यवाही के।, अस्पताल के माध्यम से आवेदन: मरीजों को स्वयं आवेदन करने की आवश्यकता नहीं, अस्पताल ही आवेदन करेगा।, ऑनलाइन दस्तावेज सत्यापन: आधार, आय प्रमाणपत्र, राशन कार्ड आदि का डिजिटल सत्यापन।, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT): स्वीकृत राशि सीधे अस्पताल के खाते में जमा होगी।, 3,000 से अधिक अस्पतालों का नेटवर्क: सरकारी और निजी अस्पतालों को जोड़ा गया है।, हेल्पलाइन और डिजिटल सहायता: टोल-फ्री नंबर 1800 123 2211 और व्हाट्सएप के जरिए मार्गदर्शन।, मोबाइल ऐप सुविधा: नजदीकी अस्पताल, एंबुलेंस और ब्लड बैंक की जानकारी आसानी से उपलब्ध।, एनजीओ और CSR साझेदारी: स्वयंसेवी संस्थाओं और कॉर्पोरेट फंड के जरिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता।, त्रिपक्षीय समझौता मॉडल: अस्पताल, CSR संस्था और सहायता निधि के बीच साझा जिम्मेदारी।, बेड मैनेजमेंट सिस्टम: धर्मादाय अस्पतालों में बेड उपलब्धता की रियल-टाइम जानकारी।
इसके अलावा, “रुग्ण मित्र” नाम से 24x7 टोल-फ्री हेल्पलाइन शुरू की गई है, जिससे मरीजों को तत्काल मार्गदर्शन और डिजिटल लिंक के माध्यम से आवश्यक सेवाओं की जानकारी मिल सकेगी।
सरकार ने लोक सहभागिता बढ़ाने के लिए एनजीओ के लिए अलग ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार किया है, जिससे वे सीधे शासन के साथ जुड़कर स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान दे सकेंगे। खासतौर पर कैंसर जैसे गंभीर रोगों के उपचार में यह पहल मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
कार्यक्रम में बृहन्मुंबई महानगरपालिका की आयुक्त अश्विनी भिडे, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जबकि जिलाधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सहभागिता की।
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