पालघर: जिले में श्रद्धा, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम।गणेश नाईक ने दुर्वेश स्थित बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर में दर्शन कर जलसार वन क्षेत्र का किया निरीक्षण।
पालघर: जिले में श्रद्धा, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम।
गणेश नाईक ने दुर्वेश स्थित बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर में दर्शन कर जलसार वन क्षेत्र का किया निरीक्षण।
अखिलेश चौबे
पालघर। जिले के दुर्वेश क्षेत्र में उस समय श्रद्धा, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम देखने को मिला, जब वन मंत्री तथा पालघर जिले के पालक मंत्री गणेश नाईक ने यहां नव-निर्मित बीएपीएस श्री स्वामीनारायण मंदिर में आयोजित मूर्ति प्रतिष्ठा महोत्सव में शामिल होकर दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर उनके साथ सांसद हेमंत सवरा और पुलिस अधीक्षक यतीश देशमुख भी उपस्थित रहे। भव्य मंदिर परिसर में आयोजित इस समारोह ने धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
मौके पर उपस्थित श्रद्धालुओं से संवाद करते हुए गणेश नाईक ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और सामाजिक समरसता को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने बीएपीएस श्री स्वामीनारायण संस्था द्वारा किए जा रहे सामाजिक और जनकल्याणकारी कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी संस्थाएं समाज के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
अपने दौरे के दौरान गणेश नाईक ने जलसार स्थित वन क्षेत्र का भी विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वहां की समृद्ध प्राकृतिक संपदा, जैव विविधता और चल रहे संरक्षण कार्यों की जानकारी ली। वन विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा करते हुए उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के बीच संतुलन बनाए रखने पर विशेष जोर दिया और कहा कि विकास के साथ प्रकृति का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि जलसार वन क्षेत्र पालघर जिले का एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय क्षेत्र है, जहां चलाए जा रहे संरक्षण प्रयास न केवल वन संपदा को सुरक्षित रखने में सहायक हैं, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।
इस पूरे दौरे के माध्यम से गणेश नाईक ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि धार्मिक आस्था और पर्यावरणीय जिम्मेदारी एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों के संतुलन से ही समाज का सतत और समावेशी विकास संभव है।
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