पालघर: अवैध पटाखा कारखाने में विस्फोट, उपसभापति डॉ. नीलम गोरे ने किया निरीक्षण; श्रमिक सुरक्षा हेतु औद्योगिक ढांचा बनाने पर जोर।

पालघर: अवैध पटाखा कारखाने में विस्फोट, उपसभापति डॉ. नीलम गोरे ने किया निरीक्षण; श्रमिक सुरक्षा हेतु औद्योगिक ढांचा बनाने पर जोर।

अखिलेश चौबे
पालघर। जिले के वाडा तहसील अंतर्गत कोनसाई गांव में 21 अप्रैल को एक अवैध पटाखा कारखाने में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। इस दुर्घटना में दो श्रमिकों की मृत्यु हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद राज्य विधानपरिषद की उपसभापति डॉ. नीलम गोरे ने घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया तथा घायलों और उनके परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी।
डॉ. गोरे ने कोनसाई गांव पहुंचकर विस्फोटग्रस्त क्षेत्र का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों से घटना की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने वाडा स्थित शासकीय अस्पताल में भर्ती घायलों से भेंट की। उन्होंने पीड़ित श्रमिकों और उनके परिवारजनों से बातचीत कर उन्हें मानसिक संबल प्रदान किया तथा हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दुर्घटना से प्रभावित परिवारों को शासन स्तर से आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी और इसके लिए वे स्वयं पहल करेंगी। साथ ही उन्होंने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री को विस्तृत निवेदन प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
इस दौरान डॉ. गोरे ने पुलिस, राजस्व, श्रम विभाग तथा औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर विस्तृत चर्चा की। पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संचालनालय द्वारा सभी अधिकृत कारखानों की सूची सार्वजनिक की जानी चाहिए और उसकी नियमित जांच ग्रामसेवक एवं पुलिस पाटिल द्वारा की जानी चाहिए। यदि ग्रामसेवक अनुपस्थित हों, तो यह जिम्मेदारी पुलिस पाटिल निभाएं, तथा जहां यह व्यवस्था भी न हो, वहां संबंधित पुलिस निरीक्षक को यह दायित्व सौंपा जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन स्थानों पर दस से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं, वहां श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन अनिवार्य किया जाना चाहिए। इसके लिए राजस्व, ग्रामविकास, श्रम तथा औद्योगिक सुरक्षा विभागों के बीच समन्वय अत्यंत आवश्यक है। प्रत्येक कारखाने में सुरक्षा उपायों को अनिवार्य करते हुए ‘अग्नि रक्षक’ की नियुक्ति भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
डॉ. गोरे ने श्रमिकों की सुरक्षा के लिए एक व्यापक ‘औद्योगिक सुरक्षा ढांचा’ तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि श्रमिकों के शोषण से संबंधित शिकायतों को ग्रामविकास विभाग द्वारा दर्ज किया जाए और उस पर त्वरित कार्रवाई की जाए।
उन्होंने बताया कि इस पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को प्रस्तुत की जाएगी और शासन स्तर पर आवश्यक कदम उठाने के लिए निरंतर प्रयास किया जाएगा।
इस बीच, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के निर्देशानुसार मृतक श्रमिक भावेश वावरे के परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। साथ ही डॉ. गोरे ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस मामले के आरोपी को जमानत न मिले और उसे कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए सक्षम सरकारी वकील की नियुक्ति की जाए।
इस अवसर पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधि एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने घटना की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। यह दुर्घटना एक बार फिर अवैध औद्योगिक गतिविधियों पर कड़ी निगरानी और श्रमिकों की सुरक्षा के प्रति गंभीरता बरतने की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

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