मीरा रोड: खून का खेल: अकेले हमलावर की सनक ने मचाया आतंक।चाकूबाजी से पहले धार्मिक पहचान पूछी, ‘कलमा’ न पढ़ पाने पर किया हमला।

मीरा रोड: खून का खेल: अकेले हमलावर की सनक ने मचाया आतंक।
चाकूबाजी से पहले धार्मिक पहचान पूछी, ‘कलमा’ न पढ़ पाने पर किया हमला।

अखिलेश चौबे 
मीरा रोड। मुंबई के मीरा रोड इलाके में हुई सनसनीखेज चाकूबाजी की घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। दो सुरक्षा गार्डों पर जानलेवा हमला करने वाला आरोपी ज़ैब जुबैर अंसारी अब एक ‘लोन वुल्फ’ हमलावर के रूप में सामने आया है, जिसने कथित तौर पर इंटरनेट, किताबों और कट्टरपंथी सामग्री से प्रभावित होकर अकेले ही इस हमले को अंजाम दिया।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी ज़ैब जुबैर अंसारी ने हमले से पहले आतंकी संगठन ISIS के प्रति ‘बैअत’ (धार्मिक कसम) ली थी। इतना ही नहीं, पुलिस सूत्रों ने खुलासा किया है कि वह पिछले करीब पांच महीनों से विदेश में बैठे किसी ISIS हैंडलर के संपर्क में था और ऑनलाइन माध्यम से लगातार बातचीत कर रहा था।
जांच में सामने आया है कि ज़ैब जुबैर अंसारी हमले के इरादे से ही अपने घर से चाकू लेकर निकला था। महाराष्ट्र एटीएस (एंटी टेररिज्म स्क्वाड) ने उसके पास से तीन मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद किया है। इन सभी डिजिटल डिवाइस की गहन फॉरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपी किन-किन लोगों के संपर्क में था और हमले की साजिश कैसे रची गई।

‘क्या तुम हिंदू हो?’—चश्मदीद ने सुनाई दहला देने वाली कहानी
इस खौफनाक वारदात के चश्मदीद वॉचमैन हरी सिंह ने उस रात का भयावह मंजर बयान किया। उनके अनुसार, हमला करने के बाद आरोपी उनके पास आया, पानी मांगा और अपने हाथों से खून साफ करने लगा। इसके बाद उसने सीधा सवाल किया—“क्या तुम हिंदू हो?”

हरी सिंह ने जवाब दिया—“हम सब अपने हैं।”
इस पर आरोपी ने कहा—“मैं तुम्हें नहीं मारूंगा” और वहां से चला गया। यह बयान आरोपी की मानसिकता और उसके मकसद पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

‘कलमा’ न पढ़ पाने पर किया ताबड़तोड़ हमला
घटना में घायल सुरक्षा गार्ड सुब्रतो सेन और उनके सुपरवाइजर राजकेश्वर मिश्रा ने भी चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उनके मुताबिक, आरोपी ने पहले उनकी धार्मिक पहचान जानने की कोशिश की।
सुब्रतो सेन ने बताया कि आरोपी ने उनसे पूछा कि क्या वे हिंदू हैं। इसके बाद उसने राजकेश्वर मिश्रा से ‘कलमा’ पढ़ने को कहा। जब मिश्रा ऐसा नहीं कर सके, तो आरोपी ने उन पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस हमले में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए और उनका इलाज जारी है।

अमेरिका से भारत तक—आरोपी की रहस्यमयी पृष्ठभूमि
जांच में आरोपी की पृष्ठभूमि भी बेहद उलझी हुई सामने आई है। ज़ैब जुबैर अंसारी के माता-पिता मूल रूप से मुंबई के कुर्ला इलाके के रहने वाले हैं। करीब 20 साल पहले वे अपने परिवार के साथ अमेरिका चले गए थे और आज भी वहीं रह रहे हैं।
आरोपी के पिता अमेरिका में कैब ड्राइवर के रूप में काम करते हैं। पारिवारिक विवाद के बाद ज़ैब जुबैर अंसारी वर्ष 2019 में भारत लौट आया था। तब से वह मीरा रोड के नयागांव इलाके में किराए के मकान में रह रहा था और ऑनलाइन ट्यूशन पढ़ाकर अपना गुजारा कर रहा था।
पड़ोसियों के अनुसार, वह बेहद अकेला रहता था, किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करता था और हाल के महीनों में आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। बताया गया है कि वह पिछले तीन महीनों से किराया भी नहीं चुका पाया था।

घर से मिले जिहादी नोट्स और ‘लोन वुल्फ’ हमले के संकेत
महाराष्ट्र एटीएस को आरोपी के नयागांव स्थित घर की तलाशी के दौरान कई अहम सुराग मिले हैं। यहां से हाथ से लिखी पर्चियां बरामद हुईं, जिन पर ‘जिहाद’, ‘ISIS’ और ‘खिलाफत’ जैसे शब्द लिखे थे।
इसके अलावा उसके लैपटॉप से धार्मिक किताबें और ‘लोन वुल्फ’ हमलों से जुड़े नोट्स भी मिले हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी ने अपना मोबाइल फोन फॉर्मेट कर दिया था, जिसे अब फॉरेंसिक तकनीक के जरिए रिकवर करने की कोशिश की जा रही है।
इंटरनेट हिस्ट्री में भी लंबे समय से हिंसक और कट्टरपंथी सामग्री देखने के प्रमाण मिले हैं, जिससे यह आशंका मजबूत हो रही है कि वह या तो किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा था या फिर खुद ही कट्टरपंथी विचारधारा के प्रभाव में आकर ‘लोन वुल्फ’ हमलावर बन गया।

सरकार का बयान: ‘सेल्फ रेडिकलाइजेशन’ का मामला
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस घटना को ‘सेल्फ रेडिकलाइजेशन’ का मामला बताया है। उन्होंने कहा कि आरोपी पर इंटरनेट, किताबों और अन्य माध्यमों से कट्टरपंथी विचारों का प्रभाव पड़ा है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब इस मामले की गहराई से जांच के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और महाराष्ट्र एटीएस मिलकर काम करेंगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपी के पीछे कोई संगठित नेटवर्क था या नहीं।
घटना के बाद पूरे मीरा-भायंदर इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस और जांच एजेंसियां आरोपी के हर डिजिटल और सामाजिक कनेक्शन को खंगाल रही हैं, ताकि हमले की पूरी साजिश का पर्दाफाश किया जा सके।

बढ़ता खतरा: ‘लोन वुल्फ’ हमले और ऑनलाइन कट्टरपंथ
मीरा रोड की यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि इंटरनेट के जरिए फैल रहा कट्टरपंथ और ‘लोन वुल्फ’ हमले समाज के लिए कितना बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। बिना किसी बड़े नेटवर्क के भी अकेले व्यक्ति द्वारा इस तरह की हिंसक घटनाओं को अंजाम देना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई चुनौती बन चुका है।
फिलहाल, जांच एजेंसियां इस मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही हैं, ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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