पालघर: टीबी मरीजों के लिए पोषण सहायता परियोजना का पाँचवाँ चरण 28 अप्रैल से शुरू।
पालघर: टीबी मरीजों के लिए पोषण सहायता परियोजना का पाँचवाँ चरण 28 अप्रैल से शुरू।
अखिलेश चौबे
पालघर। टीबी (क्षय रोग) जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए नियमित दवा के साथ पौष्टिक आहार का विशेष महत्व होता है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए रोटरी क्लब ऑफ बोईसर–तारापुर द्वारा संचालित टीबी मरीजों के लिए पोषण सहायता परियोजना का पाँचवाँ चरण 28 अप्रैल 2026 से प्रारंभ किया जा रहा है।
टीबी का उपचार लंबी अवधि तक लगातार करना आवश्यक होता है। यदि मरीज बीच में उपचार छोड़ देता है, तो बीमारी दोबारा अधिक गंभीर रूप ले सकती है। विशेष रूप से मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस (एमडीआर) टीबी के मामलों में उपचार छह माह या उससे अधिक समय तक चलता है, जिससे मरीजों को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
सरकार द्वारा टीबी मरीजों को निःशुल्क दवाइयाँ उपलब्ध कराई जाती हैं, लेकिन शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रोटीन युक्त पोषण आहार की भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी उद्देश्य से रोटरी क्लब ऑफ बोईसर–तारापुर लगातार जरूरतमंद मरीजों को पोषण सहायता प्रदान कर रहा है।
परियोजना के पाँचवें चरण के अंतर्गत 30 टीबी मरीजों को प्रति माह एक हजार रुपये मूल्य के पोषण आहार पैकेट लगातार छह माह तक उपलब्ध कराए जाएंगे। यह सेवा कार्य जिला टीबी अधिकारी के मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण में संचालित किया जा रहा है।
क्लब के अध्यक्ष राम नारायण गोयल के नेतृत्व में इस परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। परियोजना निदेशक विनायक डी. पदमवार तथा परियोजना समन्वयक डॉ. पराग कुलकर्णी के विशेष प्रयासों से यह सेवा कार्य निरंतर सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। इसके साथ ही क्लब सचिव शैलेश एच. अग्रवाल भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि रोटरी क्लब ऑफ बोईसर–तारापुर द्वारा प्रायोजित “इंस्पायर वर्ष” के अंतर्गत इस परियोजना में सहयोग देने वाले “निक्षय मित्र” को सरकार द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाता है।
इस चरण को सफल बनाने में भगेरिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड, प्लास्टोमेन पाइपिंग्स प्राइवेट लिमिटेड, रोटेरियन नमन कपिल कनोई, विनायक डी. पदमवार तथा मारुति रघुनाथ कदम का महत्वपूर्ण आर्थिक सहयोग प्राप्त हो रहा है।
समाज के सहयोग से संचालित इस पहल के माध्यम से जरूरतमंद टीबी मरीजों को न केवल पोषण सहायता मिल रही है, बल्कि उनके स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन की दिशा में एक सशक्त प्रयास भी किया जा रहा है।
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