मुंबई: मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे को मिलेगा बड़ा बूस्ट: ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना से घाट का बायपास, 1 मई को उद्घाटन।एकनाथ शिंदे ने किया निरीक्षण, देवेंद्र फडणवीस करेंगे लोकार्पण; यात्रा होगी तेज, सुरक्षित और सिग्नल-फ्री।

मुंबई: मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे को मिलेगा बड़ा बूस्ट: ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना से घाट का बायपास, 1 मई को उद्घाटन।
एकनाथ शिंदे ने किया निरीक्षण, देवेंद्र फडणवीस करेंगे लोकार्पण; यात्रा होगी तेज, सुरक्षित और सिग्नल-फ्री।

अखिलेश चौबे 
मुंबई: मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर लंबे समय से प्रतीक्षित ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। लगभग 99 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और 1 मई को इसका उद्घाटन देवेंद्र फडणवीस के हाथों किया जाएगा। इस परियोजना के शुरू होते ही घाट क्षेत्र की यातायात समस्या में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, साथ ही यात्रा अधिक तेज, सुरक्षित और निर्बाध हो जाएगी।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने परियोजना स्थल का दौरा कर कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता का जायजा लिया। निरीक्षण के बाद उन्होंने कहा कि काम संतोषजनक स्तर पर पूरा हुआ है और शेष छोटे-मोटे कार्य भी जल्द समाप्त कर दिए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्धारित समय सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ कार्य पूर्ण किया जाए।
करीब 10.5 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में अत्याधुनिक इंजीनियरिंग का उपयोग किया गया है। इसमें दो विशाल सुरंगें, ऊंचे वायाडक्ट और टाइगर वैली के ऊपर लगभग 182 मीटर ऊंचा केबल-स्टे पुल शामिल है। इस परियोजना का सुरंग खंड करीब 23.75 मीटर चौड़ा है, जिसे दुनिया के सबसे चौड़े सुरंगों में गिना जा रहा है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, तेज हवाओं और भारी वर्षा के बावजूद इसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया है।
इस मार्ग का एक हिस्सा लोनावला क्षेत्र के जलाशय के लगभग 182 मीटर नीचे से गुजरता है, जो इस परियोजना को और भी तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण बनाता है। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (MSRDC) ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए परियोजना को सफलतापूर्वक अंतिम चरण तक पहुंचाया है।
‘मिसिंग लिंक’ के चालू होने के बाद घाट क्षेत्र के खतरनाक मोड़ और जाम की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। यात्रा समय में लगभग 20 से 30 मिनट की कमी आएगी। एकनाथ शिंदे ने दावा किया कि इससे दुर्घटनाओं में भारी गिरावट आएगी और घाट क्षेत्र में हादसे लगभग शून्य के करीब पहुंच जाएंगे।
इस परियोजना से मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे की कुल दूरी भी लगभग 6 किलोमीटर कम हो जाएगी। प्रारंभिक चरण में इस मार्ग पर हल्के वाहनों और बसों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे यातायात का दबाव संतुलित किया जा सके।
टोल को लेकर स्पष्ट करते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि इस परियोजना के कारण किसी भी प्रकार की टोल वृद्धि नहीं की जाएगी। खालापुर टोल नाके पर भी फिलहाल कोई बढ़ोतरी प्रस्तावित नहीं है।
करीब 6700 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना को वर्ष 2019 में मंजूरी दी गई थी, जब देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री थे। अब उनके ही हाथों इसका उद्घाटन होना एक विशेष संयोग माना जा रहा है।
मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे देश का पहला एक्सेस कंट्रोल मार्ग रहा है, जिसने आईटी, सेवा क्षेत्र, उद्योग और रियल एस्टेट के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना के जुड़ने से इस मार्ग की क्षमता और दक्षता में और वृद्धि होगी।
इसके अलावा, इस परियोजना से लोहगड किला, विसापुर किला और कार्ला गुफाएं जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच और आसान हो जाएगी, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। परियोजना के सुरंगों को इन ऐतिहासिक स्थलों की थीम के अनुरूप सजाया गया है, जिससे यात्रियों को एक अलग अनुभव मिलेगा।

एकनाथ शिंदे ने कहा कि इस तरह की परियोजनाएं केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने का काम करती हैं। बेहतर कनेक्टिविटी से उद्योग, आईटी, सेवा क्षेत्र और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होती है।
उन्होंने आगे बताया कि भविष्य में समृद्धि महामार्ग, कोकण कोस्टल रोड और वसई–विरार मल्टीमोडल कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट्स को आपस में जोड़कर राज्य में एक्सेस कंट्रोल सड़कों का मजबूत नेटवर्क विकसित किया जाएगा। उनका लक्ष्य है कि महाराष्ट्र के किसी भी कोने से दूसरे कोने तक 7 से 8 घंटे में पहुंचा जा सके।
इस अवसर पर सांसद श्रीरंग बारणे, आबासाहेब बागुल, एमएसआरडीसी के प्रबंध निदेशक अनिलकुमार गायकवाड सहित एमएसआरडीसी, एफ्कॉन और नवयुग कंपनी के वरिष्ठ अभियंता और कर्मचारी उपस्थित रहे।
इस परियोजना के शुरू होने के बाद मुंबई और पुणे के बीच यात्रा अधिक तेज, सुरक्षित और सुगम होने की उम्मीद है, जिससे राज्य के समग्र विकास को नई गति मिलेगी।

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