पालघर: शीतल सोलंकी ने ग्रहण किया संयम मार्ग, पांच दिवसीय दीक्षा महोत्सव संपन्न।
पालघर: शीतल सोलंकी ने ग्रहण किया संयम मार्ग, पांच दिवसीय दीक्षा महोत्सव संपन्न।
अखिलेश चौबे
पालघर। माया नगरी के समीप स्थित उपनगर बोईसर की निवासी मुमुक्षु शीतल सोलंकी ने सांसारिक जीवन का त्याग कर संयम मार्ग को स्वीकार करते हुए जैन साध्वी के रूप में दीक्षा ग्रहण की। उनका पांच दिवसीय भव्य दीक्षा महोत्सव मेवाड़ क्षेत्र के कमोल गांव में अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुआ। 22 फरवरी को उपाध्याय गौतम मुनि (प्रथम) ने महासती संयमलता के सान्निध्य में उन्हें दीक्षा प्रदान की। दीक्षा के पश्चात साध्वी कमल प्रज्ञा ने शीतल का नया नाम साध्वी आगम प्रज्ञा घोषित किया, जिसे उपस्थित हजारों धर्मप्रेमियों ने जयघोष के साथ स्वीकार किया।
स्थानकवासी जैन संघ बोईसर के अध्यक्ष रूपचंद घाटावत के अनुसार यह पांच दिवसीय आयोजन सकल जैन श्री संघ कमोल के सान्निध्य में आयोजित हुआ। 18 फरवरी को पाठ पूजन और केसर छापा, 19 फरवरी को गुरु भगवंत के सान्निध्य में अनुष्ठान तथा फले चुंदड़ी, 20 फरवरी को तुला दान और मेंहदी रस्म, 21 फरवरी को विशाल वरघोड़ा, मायरा तथा भजन संध्या का आयोजन हुआ। अंतिम दिन 22 फरवरी को दीक्षा संस्कार संपन्न हुआ, जब मुमुक्षु शीतल के संयम जीवन की औपचारिक शुरुआत हुई।
दीक्षा से पूर्व शीतल सोलंकी को गाजे-बाजे के साथ पालकी में उनके घर से दीक्षा स्थल तक लाया गया। काका महावीर जैन ने बताया कि सोलंकी परिवार ने अत्यंत श्रद्धा और भावनात्मक वातावरण में अपनी पुत्री को संतों को समर्पित किया। इसके बाद संतों ने शीतल को उनकी माता मंजू देवी, चाचा-चाची तथा अन्य परिजनों से अंतिम बार मिलवाया। भावुक मिलन के उपरांत मुमुक्षु ने संयम मार्ग पर चलने के अपने संकल्प को व्यक्त करते हुए सभी परिजनों, शुभचिंतकों और धर्मप्रेमियों के प्रति आभार प्रकट किया।
दीक्षा समारोह का संचालन महासती संयमलता ने किया। उपाध्याय गौतम मुनि ने प्रवचन में कहा कि संयम आत्मा की रक्षा का सर्वोत्तम साधन है और चरित्र का सर्वोच्च वैभव संयम में ही निहित है। संत विनय मुनि ने गीतिका के माध्यम से वातावरण को भक्तिभाव से ओतप्रोत कर दिया। साध्वी संयमलता ने सोलंकी परिवार, कमोल जैन श्री संघ तथा बोईसर जैन श्री संघ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। दीक्षा के पश्चात नवदीक्षित साध्वी आगम प्रज्ञा महासती संयमलता के संघ के साथ विहार के लिए प्रस्थान कर गईं, जबकि उपस्थित साध्वी वृंद ने मंगल गीत गाकर उनका स्वागत किया।
कमोल गांव के प्रवासी चंदन सोलंकी की पुत्री शीतल सोलंकी द्वारा अपने पैतृक गांव में दीक्षा ग्रहण करने से क्षेत्र में विशेष गौरव का वातावरण रहा। इससे पूर्व भी कमोल गांव में प्रवीण मुनि तथा साध्वी रत्न नयन ज्योति ने दीक्षा ली थी, किंतु शीतल की दीक्षा को ऐतिहासिक माना जा रहा है। इस अवसर पर महा श्रमण जिनेंद्र मुनि, रमेश मुनि, विजय मुनि, कोमल मुनि, महासती संयमलता, मेवाड़ सिंहनी शांता कंवर, कंचन कंवर, सुप्रभा सहित अनेक संत-साध्वी उपस्थित रहे।
समारोह में पूर्व अध्यक्ष मुकेश सोलंकी, गुलाब सोलंकी, जयंतीलाल माद्रेचा, नाथूलाल जैन, हरीशा जैन, कांतिलाल इटोदिया, महेंद्र सोलंकी, नरेश माद्रेचा, बसतीलाल घाटावत, सुरेश दोषी, रूपचंद घाटावत, सुरेश कोठारी, युगराज दोशी, विनोद घाटावत, अजय घाटावत, मितेश जैन, दीपक घाटावत, विक्रम सोलंकी सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। पालघर, विरार, सूरत, बड़ौदा तथा अहमदाबाद से भी बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबियों ने भाग लिया।
यह भी उल्लेखनीय है कि शीतल सोलंकी बोईसर संघ के पूर्व अध्यक्ष चंदन सोलंकी की पुत्री तथा विश्व हिंदू परिषद जिला पालघर अध्यक्ष महावीर जैन की भतीजी हैं। महावीर सोलंकी के अनुसार इस आयोजन की सफलता में सकल जैन श्री संघ कमोल का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कमोल गांव में मेवाड़ संघ मुंबई, फतेहनगर दरीबा, नाथद्वारा, उदयपुर, जावरा और मंदसौर के श्री संघों ने भी सहभागिता की। इसके अतिरिक्त करदा पदराडा, सायरा, गोगुंदा, ढोला और नांदेश्मा सहित आसपास के गांवों से हजारों श्रद्धालु उपस्थित हुए, जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक उत्सव में परिवर्तित हो गया।
पांच दिवसीय इस दीक्षा महोत्सव ने न केवल कमोल गांव बल्कि समूचे जैन समाज में आध्यात्मिक जागरण और त्याग की प्रेरणा का संदेश दिया तथा इसे लंबे समय तक स्मरणीय बना दिया।
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