पालघर: “हिंद दी चादर” का संदेश विद्यार्थियों के मन में स्थापित करना आवश्यक — जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़।
पालघर: “हिंद दी चादर” का संदेश विद्यार्थियों के मन में स्थापित करना आवश्यक — जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़।
अखिलेश चौबे
पालघर। जिले के वाडा तहसील अंबिस्ते स्थित शासकीय आश्रमशाला में आयोजित विशेष कार्यक्रम में जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़ ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद करते हुए “हिंद दी चादर” की मूल भावना को उनके मन में स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध सूफी गायक सतिंदर सरताज द्वारा प्रस्तुत भक्तिगीतों ने पूरे परिसर को भक्तिमय और प्रेरणादायी वातावरण से भर दिया।
इस अवसर पर प्रांत अधिकारी प्रदीप चव्हाण, शिक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, मुख्याध्यापक, शिक्षक तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।
भक्तिगीत प्रस्तुति के बाद जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़ ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए पूछा कि क्या किसी को गीत का अर्थ समझ में आया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कार्य के पीछे छिपे अर्थ को समझना आवश्यक है। केवल सुनना पर्याप्त नहीं, बल्कि उससे मिलने वाले मूल्यों को जीवन में उतारना अधिक महत्वपूर्ण है।
उन्होंने सिख धर्म के नौवें गुरु गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी वर्ष के संदर्भ में आयोजित कार्यक्रम का महत्व बताते हुए कहा कि “हिंद दी चादर” का अर्थ केवल किसी एक धर्म की रक्षा नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतभूमि की आस्था, स्वतंत्रता और मानवता की रक्षा करना है। यह संदेश धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक सद्भाव को सुदृढ़ करने वाला है।
जिलाधिकारी ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, जहां प्रत्येक नागरिक को अपनी श्रद्धा के अनुसार धर्म का पालन करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। किसी को भी जबरन धर्म परिवर्तन के लिए बाध्य करना गलत है। उन्होंने बताया कि गुरु तेग बहादुर ने इन्हीं मूल्यों की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया था।
गुरुद्वारों में प्रचलित सेवा परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने निस्वार्थ सेवा, विनम्रता और आत्मनिर्भरता के महत्व को भी समझाया। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति समाज के लिए समर्पित होकर कार्य करे और अपने दायित्व स्वयं निभाए, तो वास्तविक प्रगति संभव है।
डॉ. इंदु रानी जाखड़ ने अंबिस्ते स्थित आश्रमशाला के सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण, विद्यार्थियों की जिज्ञासा और शिक्षकों के समर्पित प्रयासों की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने विद्यार्थियों को महान व्यक्तित्वों के आदर्शों को अपनाकर जीवन में सफलता प्राप्त करने की शुभकामनाएँ दीं।
यह कार्यक्रम विद्यार्थियों में राष्ट्रीय एकता, मानवीय मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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