पालघर: फर्जी कॉल सेंटर चलाकर विदेशी नागरिकों से ठगी करने वाले गिरोह का जिला पुलिस ने भंडाफोड़ किया।
पालघर: फर्जी कॉल सेंटर चलाकर विदेशी नागरिकों से ठगी करने वाले गिरोह का जिला पुलिस ने भंडाफोड़ किया।
अखिलेश चौबे
पालघर। जिले के पालघर पश्चिम स्थित माहिम क्षेत्र की एक आवासीय इमारत में अवैध रूप से संचालित फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठगी करने वाले गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। स्थानीय अपराध शाखा को गोपनीय सूचना प्राप्त हुई थी कि उक्त कॉल सेंटर के माध्यम से विदेशी नागरिकों, विशेषकर अमेरिका के लोगों को निशाना बनाकर उनसे धोखाधड़ी की जा रही है और भारी आर्थिक लाभ कमाया जा रहा है।
प्राप्त सूचना के आधार पर पालघर के पुलिस अधीक्षक यतिश देशमुख के मार्गदर्शन में स्थानीय अपराध शाखा की टीम गठित की गई। पुलिस निरीक्षक प्रदीप पाटील के नेतृत्व में टीम ने 24 फरवरी 2026 की रात लगभग 12:10 बजे माहिम, पालघर पश्चिम स्थित फिया एकांत बिल्डिंग के कक्ष संख्या 303 पर सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए छापा मारा। कार्रवाई के दौरान फ्लैट के अंदर पांच व्यक्ति संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाए गए।
तलाशी के दौरान पुलिस को कुल 5,72,000 रुपये मूल्य का सामान बरामद हुआ, जिसमें 4 लैपटॉप, 12 मोबाइल फोन, 4 हेडफोन, टीपी लिंक कंपनी का एक राउटर तथा एयरटेल कंपनी का एक डोंगल शामिल है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान भरत लोकु लालवानी (35 वर्ष), निवासी ई/2605, एमआईसीएल बिल्डिंग, ठाकुर मॉल के पास, मीरा रोड पूर्व, जिला ठाणे; रोहित राजेंद्र निंबाळकर (29 वर्ष), निवासी प्लॉट नंबर 8/9, कुंजीरवाड़ी, स्वामी भवन बिल्डिंग, नायगांव, तहसील हवेली, जिला पुणे; रोहित मिलिंद झोहे (23 वर्ष), निवासी बिल्डिंग नंबर 04, फ्लैट नंबर 101, वासुदेव पैराडाइज, लक्ष्मी पार्क, मीरा रोड, जिला ठाणे; अमरदीप अंग्रेज गिल (24 वर्ष), निवासी कक्ष संख्या बी/404, न्यू साई चरण दर्शन बिल्डिंग, भाईंदर पूर्व, जिला ठाणे तथा मूल निवासी मोहाली, अमृतसर, पंजाब; और सागर बलदेव पाठडिया (29 वर्ष), निवासी फ्लैट नंबर 101, ए विंग, श्रीपाद रेसिडेंसी, कामरेज, सूरत, गुजरात के रूप में हुई है।
जांच में सामने आया कि आरोपी अवैध रूप से अमेरिका के नागरिकों के मोबाइल नंबर, नाम और अन्य व्यक्तिगत जानकारी एकत्र करते थे। इसके बाद वे स्वयं को माइक्रोसॉफ्ट या एप्पल कंपनी का प्रतिनिधि बताकर कॉल करते थे और झूठा दावा करते थे कि पीड़ित के कंप्यूटर या मोबाइल में वायरस प्रवेश कर गया है। बातचीत में उलझाकर वे यह भी कहते थे कि डिवाइस हैक हो चुका है और समस्या के समाधान के लिए भुगतान करना आवश्यक है।
आरोपी पीड़ितों से Lawes, Apple, Nike तथा Amazon कंपनियों के गिफ्ट कार्ड खरीदने को कहते थे, जिनकी राशि प्रायः 500 अमेरिकी डॉलर से लेकर 4000 अमेरिकी डॉलर तक होती थी। बाद में इन गिफ्ट कार्डों की राशि को यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) में परिवर्तित कर हवाला के माध्यम से नकद धन के रूप में प्राप्त किया जाता था। इस प्रकार यह गिरोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर ठगी कर रहा था।
इस मामले में पालघर पुलिस थाने में अपराध क्रमांक 51/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 318(2), 319(2), 336(2), 338, 340(2), 61(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66(डी) और 66(सी) के अंतर्गत 24 फरवरी 2026 को मामला दर्ज किया गया है।
सभी पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें 28 फरवरी 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। मामले की आगे की जांच पुलिस निरीक्षक प्रदीप पाटील, स्थानीय अपराध शाखा, पालघर द्वारा की जा रही है।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक यतिश देशमुख तथा अपर पुलिस अधीक्षक विनायक नरळे के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। अभियान में पुलिस निरीक्षक प्रदीप पाटील के साथ सहायक पुलिस निरीक्षक अनिल व्हटकर, सहायक पुलिस निरीक्षक योगेश शिंदे, पुलिस उपनिरीक्षक गोरखनाथ राठोड, सहायक पुलिस उपनिरीक्षक राजेश वाघ, पुलिस हवालदार कपिल नेमाडे, भगवान आव्हाड, राकेश पाटील, संदीप सूर्यवंशी, दिलीप जनाठे, दीपक राऊत, नरेंद्र पाटील, पुलिस नायक बजरंग अमनवाड, नरेश घाटाळ (सभी स्थानीय अपराध शाखा, पालघर) तथा पुलिस नायक रामदास दुर्गेष्ट (सायबर पुलिस थाना, पालघर) ने भाग लिया।
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