मुंबई: जटिल एबीओ-असंगत किडनी ट्रांसप्लांट सफल, 28 वर्षीय युवक को मिला नया जीवन।
मुंबई: जटिल एबीओ-असंगत किडनी ट्रांसप्लांट सफल, 28 वर्षीय युवक को मिला नया जीवन।
अखिलेश चौबे
मुंबई। उन्नत किडनी उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स, मीरा रोड में 28 वर्षीय युवक का अत्यंत जटिल और उच्च जोखिम वाला एबीओ-असंगत (ब्लड ग्रुप अलग होने के बावजूद) किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया। यह सर्जरी चिकित्सा विज्ञान, सटीक योजना और विशेषज्ञ टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है।
युवक एंड-स्टेज रीनल डिज़ीज़ (किडनी की अंतिम अवस्था की बीमारी) से पीड़ित था। इसके साथ ही उसे क्रॉनिक इम्यून थ्रोम्बोसाइटोपेनिक पर्पुरा (आईटीपी) नामक गंभीर रक्त संबंधी बीमारी भी थी। पहले उसकी तिल्ली निकालने की सर्जरी की जा चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद उसका प्लेटलेट काउंट घटकर मात्र 25,000 रह गया था, जबकि सामान्य स्थिति में प्लेटलेट्स की संख्या 1.5 लाख से अधिक होती है।
इतनी कम प्लेटलेट संख्या के कारण ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव का जोखिम था, जिससे यह ट्रांसप्लांट और भी चुनौतीपूर्ण बन गया।
स्थिति को और जटिल बनाते हुए मरीज और उसकी मां का ब्लड ग्रुप अलग था। एबीओ-असंगत प्रत्यारोपण में शरीर नई किडनी को अस्वीकार कर सकता है, क्योंकि एंटीबॉडी नई किडनी पर हमला करती हैं। इसके बावजूद मां ने किडनी दान करने का निर्णय लिया, जो भावनात्मक और चिकित्सकीय दोनों दृष्टियों से साहसिक कदम था।
सर्जरी से पहले विशेषज्ञों की टीम ने विशेष डिसेंसिटाइजेशन प्रोटोकॉल लागू किया। इसके तहत कई बार प्लाज़्माफेरेसिस की प्रक्रिया अपनाई गई, जिसमें रक्त से हानिकारक एंटीबॉडी को निकाला गया। साथ ही उन्नत इम्यूनोथेरेपी दी गई, ताकि शरीर में एंटीबॉडी का स्तर कम किया जा सके और प्लेटलेट्स की संख्या को स्थिर रखा जा सके।
ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक सावधानी और उन्नत सर्जिकल तकनीक का उपयोग किया गया। सर्जरी के बाद मरीज की गहन निगरानी की गई, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि नई किडनी सुचारु रूप से कार्य करती रहे और किसी प्रकार की जटिलता उत्पन्न न हो।
इस जटिल ट्रांसप्लांट की योजना और इम्यूनोलॉजिकल प्रबंधन का नेतृत्व कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. पुनीत भुवानिया ने किया। उन्होंने बताया कि मरीज को एक साथ कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं थीं, जिससे यह केस अत्यंत चुनौतीपूर्ण बन गया था। लेकिन सुविचारित योजना, कठोर मॉनिटरिंग और टीम के समन्वित प्रयासों से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुआ।
ट्रांसप्लांट सर्जरी विशेषज्ञों की टीम द्वारा संपन्न की गई, जिसमें शामिल थे — डॉ. जयेश धाबालिया, कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट एवं ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. प्रदीप प्रभाकर व्यावहारे, कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट, यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट एवं किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. प्रकाश तेजवानी, कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट एवं एंड्रोलॉजिस्ट डॉ. आशुतोष बघेल, कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट एवं रीनल ट्रांसप्लांट सर्जन सर्जरी के दौरान टीम ने उच्च स्तर की सटीकता सुनिश्चित की और ऑपरेशन के बाद व्यापक देखभाल प्रदान की।
यह सफल एबीओ-असंगत किडनी ट्रांसप्लांट न केवल एक 28 वर्षीय युवक को नया जीवन देने में सफल रहा, बल्कि यह भी सिद्ध करता है कि आधुनिक चिकित्सा तकनीक, अनुभवी विशेषज्ञों की टीम और सुव्यवस्थित रणनीति के माध्यम से अत्यंत जटिल और उच्च जोखिम वाले मामलों में भी सकारात्मक परिणाम संभव हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सफलताएं भविष्य में गंभीर किडनी रोग से पीड़ित मरीजों के लिए नई उम्मीद लेकर आएंगी।
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