पालघर: विराज कंपनी में बड़ा हादसा, सिविल डिप्लोमा धारक परेश रमेश राठोड की मौके पर मौत।
पालघर: विराज कंपनी में बड़ा हादसा, सिविल डिप्लोमा धारक परेश रमेश राठोड की मौके पर मौत।
अखिलेश चौबे
पालघर। जिले के औद्योगिक बोईसर शहर स्थित विराज कंपनी में एक बार फिर गंभीर और दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें डहाणू निवासी 34 वर्षीय सिविल डिप्लोमा धारक परेश रमेश राठोड की मौके पर ही मौत हो गई। पिछले 3 से 4 वर्ष से दीपेश बारी के अधीन सिविल कार्य में कार्यरत परेश सोमवार दोपहर अनंत दाभाडे के साथ सिविल माप लेने के लिए कंपनी पहुंचे थे। इसी दौरान अचानक दुर्घटना हो गई।
मिली जानकारी के अनुसार, मोजमाप के दौरान अनंत दाभाडे दूसरे मंजिल पर थे, जबकि परेश नीचे माप ले रहे थे। उसी समय कंपनी में क्रेन से भारी लोहे का रोल शिफ्ट किया जा रहा था। अचानक यह लोहे का रोल सीधा परेश राठोड के सिर पर गिरा और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना दोपहर लगभग 2 से 2.30 बजे के बीच घटी।
हैरानी की बात यह है कि हादसे के समय आसपास मौजूद किसी व्यक्ति को तुरंत इसकी जानकारी नहीं हुई। कई घंटे बाद परेश को वरद अस्पताल लाया गया, लेकिन तब तक डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सबसे चौंकाने वाली जानकारी यह रही कि घटनास्थल पर मौजूद अनंत दाभाडे को भी हादसे की खबर लगभग एक घंटे बाद, परेश के भाई के फोन से लगी।
◾कंपनी की लापरवाही पर परिजनों का आक्रोश
घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों ने कंपनी की लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्थाओं में गंभीर खामियों पर कड़ी नाराजगी जताई। परिजनों ने कहा कि—
> “हमें पूरी सच्चाई चाहिए। स्पॉट पंचनामा, सीसीटीवी फुटेज और पूरे हादसे की जानकारी मिलने तक हम शांत नहीं बैठेंगे। साथ ही परिवार को उचित मुआवजा मिलना चाहिए।”
◾विराज कंपनी में हादसों की बढ़ती श्रृंखला
पिछले कुछ समय से विराज कंपनी में लगातार हादसे हो रहे हैं, जिससे कामगारों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कामगारों और स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि -
> “सुरक्षा अधिकारी वास्तव में साइट पर जांच करते भी हैं या केवल ऑफिस में बैठकर कागजों में औपचारिकता पूरी करते हैं?”
परेश राठोड अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनकी बहन के विवाह की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर थी, इसलिए उन्होंने अपना विवाह भी आगे बढ़ा रखा था। अगले वर्ष बहन का विवाह कराने का उनका इरादा था, लेकिन इस अचानक हुए हादसे ने पूरे परिवार को आर्थिक और मानसिक संकट में डाल दिया है।
इस हादसे के बाद औद्योगिक सुरक्षा विभाग की नियमित जांच-पड़ताल पर भी प्रश्न उठ रहे हैं। आखिर इतनी बड़ी सुरक्षा चूक उनकी नजर से कैसे छूट गई? क्या कंपनी के सुरक्षा प्रोटोकॉल सही तरीके से जांचे जाते हैं? इन सवालों पर अब गंभीर चर्चा शुरू हो गई है।
◾हादसे से जुड़े प्रमुख सवाल, जिनके जवाब अभी तक नहीं मिले
विराज कंपनी में हुए इस हादसे ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब अब तक किसी ने स्पष्ट नहीं किए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि लोहे का रोल गिरने के बाद क्या क्रेन ऑपरेटर तुरंत नीचे आया और आया तो क्या उसने परेश राठोड पर गिरा हुआ भारी रोल देखा? यदि उसने पूरी घटना देखी थी, तो कंपनी के अधिकारियों को तत्काल सूचना क्यों नहीं दी गई? और यदि दी गई थी, तो फिर मदद पहुंचने में इतनी देर कैसे हुई? वहीं, यदि ऑपरेटर ने घटना की जानकारी ही नहीं दी, तो ऐसा क्यों हुआ—इसके पीछे क्या कारण था? इन सभी सवालों से भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि दुर्घटना के बाद परेश राठोड लगभग एक घंटे तक वहां पड़े रहे और किसी को इसकी जानकारी तक नहीं हुई। यह देरी न केवल कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाती है, बल्कि इस पूरे मामले की पारदर्शिता और जिम्मेदारी पर भी बड़ा संदेह पैदा करती है।
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