पालघर: राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस पर मनोर में चार दिवसीय भव्य कला महोत्सव संपन्न।

पालघर: राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस पर मनोर में चार दिवसीय भव्य कला महोत्सव संपन्न।

अखिलेश चौबे 
पालघर। जिले में 150वीं क्रांतिसूर्य धरतीआबा बिरसा मुंडा जयंती के उपलक्ष्य में 11 से 15 नवंबर को राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस के तहत चार दिवसीय भव्य कला महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम ने पूरे जिले से आए हजारों लोगों की उपस्थिति में ऐतिहासिक रूप लिया।
चार दिवसीय कला महोत्सव की शुरुआत 11 नवंबर को महिलाओं के लिए आयोजित हळदी-कुंकू कार्यक्रम से हुई।
12 नवंबर को जिलास्तरीय सांस्कृतिक कार्यक्रम स्पर्धा आयोजित की गई, जिसमें जिले के विभिन्न भागों से कलाकारों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
13 नवंबर को जिलास्तरीय वकृत्व स्पर्धा का आयोजन किया गया। तीनों दिनों में महिलाओं, पुरुषों और युवाओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया, जिससे कार्यक्रम स्थल पूरे समय सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहा।

15 नवंबर को आयोजित कला महोत्सव में भव्य शोभायात्रा और जनसभा कार्यक्रम मुख्य आकर्षण रहे। दिनभर चली इस शोभायात्रा में पारंपरिक सांस्कृतिक पथकों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से माहौल को जीवंत बनाया। वेदांत म्यूज़िकल, ढोल नाच, गंगागौरी महादेव नंदी वाघ, तारपा नाच, टिपरी नाच, गौरी नाच और आकर्षक चित्ररथ दल ने दर्शकों का ध्यान अपनी अनोखी प्रस्तुति से खींचा।

पालघर जिले के विभिन्न भागों से बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने उत्साह और गौरव के साथ जनजातीय संस्कृति का उत्सव मनाया। शोभायात्रा की शुरुआत स्वामी भारतानंद सरस्वतीजी महाराज के आशीर्वाद के साथ की गई, जिसके बाद यह पूरे क्षेत्र में सांस्कृतिक उमंग और जनभागीदारी का प्रतीक बन गई।
मुख्य वक्ता डॉ. संदीप धुर्वे ने सभा को संबोधित करते हुए क्रांतिसूर्य धरतीआबा बिरसा मुंडा द्वारा जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अंग्रेज सरकार और ईसाई मिशनरियों के खिलाफ छेड़े गए संघर्ष—उलगुलान और बिरसायत—की ऐतिहासिक याद दिलाई।
उन्होंने आदिवासी समाज में हो रही मिशनरी घुसपैठ, रोजगार हथियाने और अधिकारों के मुद्दों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। साथ ही राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू करने की सार्वजनिक मांग मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष करने की बात कही।

संतोष जनाठे ने अपने प्रास्ताविक भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि जनजाति समाज को राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस के रूप में एक गौरवपूर्ण पहचान प्रदान की गई है।

सम्मान और पुरस्कार वितरण समारोह में विभिन्न आदिवासी कलाकारों का सम्मान किया गया, जबकि अलग-अलग स्पर्धाओं में विजेता प्रतिभागियों को मंच पर पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम में डॉ. संदीपभाऊ धुर्वे, स्वामी भारतानंद सरस्वतीजी महाराज, संतोष जनाठे, सरपंच चेतन पाटील, नीता पाटील, निशा सवरा और बड़ी संख्या में उपस्थित आदिवासी कलाकारों ने सहभागिता दर्ज की।

कार्यक्रम का आभार मंगेश गोंड ने व्यक्त किया, जबकि मंच संचालन कुमावत सर और प्रवीण खाचे सर ने संभाला।
कला महोत्सव की दो माह की तैयारी में आदिवासी एकता मित्र मंडळ की युवा टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजन की योजना और संचालन का नेतृत्व दामोदर कासट, कुणाल बरफ, सुनील किरकिरा सर, मनोज डवला और सौ. संचिता जनाठे ने मिलकर किया, जिनकी मेहनत से यह आयोजन सफल रहा।महिला, पुरुष और युवाओं की टीम ने दो महीनों तक लगातार मेहनत कर इस महोत्सव को भव्य और सफल बनाया।

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