मुंबई: तेज गर्मी का बढ़ता प्रकोप: मुंबई में हृदय रोगियों की बढ़ी मुश्किलें, डॉक्टरों ने जारी की चेतावनी।

मुंबई: तेज गर्मी का बढ़ता प्रकोप: मुंबई में हृदय रोगियों की बढ़ी मुश्किलें, डॉक्टरों ने जारी की चेतावनी।

अखिलेश चौबे 
मुंबई। मुंबई और उसके आसपास के क्षेत्रों में लगातार बढ़ते तापमान के बीच एपेक्स ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स ने हृदय संबंधी शिकायतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। अस्पताल के अनुसार यह वृद्धि विशेष रूप से हाई-रिस्क मरीजों में देखी जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी दिल पर अतिरिक्त दबाव डालती है, जिससे हार्ट अटैक, डिहाइड्रेशन और ब्लड प्रेशर में अचानक उतार-चढ़ाव का खतरा काफी बढ़ जाता है।
हाल के आंकड़े भारत में हीटवेव की बढ़ती गंभीरता की ओर संकेत करते हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार वर्ष 2024 और 2025 की शुरुआत में देश के कई राज्यों में लंबे और अधिक तीव्र हीटवेव दर्ज किए गए हैं। पिछले एक दशक में गर्मी से जुड़ी बीमारियों और मौतों के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है, जिससे हर वर्ष हजारों लोग प्रभावित हो रहे हैं। विशेष रूप से मुंबई जैसे शहरी क्षेत्रों में अधिक नमी और उच्च जनसंख्या घनत्व के कारण स्वास्थ्य जोखिम और अधिक बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ते तापमान और हृदय तथा श्वसन रोगों के मामलों के बीच सीधा संबंध देखा जा रहा है। हीटवेव के दौरान शरीर से अत्यधिक पसीना निकलने के कारण पानी की कमी हो जाती है और रक्त की मात्रा घट जाती है। इस स्थिति में हृदय को रक्त संचार बनाए रखने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे पहले से बीमार लोगों के लिए खतरा और गंभीर हो जाता है।
डॉ. हेमंत खेमानी, जो एपेक्स ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स में कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट हैं, ने बताया कि “तेज गर्मी के दौरान शरीर का तापमान नियंत्रित करना कठिन हो जाता है, जिससे हृदय प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इस समय छाती में दर्द, धड़कन बढ़ना और अनियंत्रित ब्लड प्रेशर के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है।”
डॉ. हेमंत खेमानी ने विशेष रूप से डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि डायबिटीज के मरीजों को अपने ब्लड शुगर की नियमित जांच करनी चाहिए, क्योंकि डिहाइड्रेशन के कारण इसमें उतार-चढ़ाव हो सकता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, मीठे पेय पदार्थों से बचना और समय पर भोजन करना अत्यंत आवश्यक है। वहीं हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को अपनी दवाएं नियमित रूप से लेने और रक्तचाप की निगरानी करते रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि गर्मी के प्रभाव से ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ या घट सकता है।
डॉक्टरों ने नागरिकों को दोपहर के समय घर के अंदर रहने, अधिक से अधिक पानी पीने, हल्के और ढीले कपड़े पहनने तथा तेज धूप में भारी शारीरिक गतिविधियों से बचने की सलाह दी है। विशेष रूप से बुजुर्ग और पहले से हृदय रोग से पीड़ित लोग इस मौसम में सबसे अधिक जोखिम में हैं।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि लगातार छाती में दर्द, चक्कर आना, सांस लेने में तकलीफ या असामान्य थकान जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना आवश्यक है।
एपेक्स ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स ने नागरिकों से अपील की है कि वे हीटवेव को गंभीरता से लें और समय रहते आवश्यक सावधानियां अपनाएं। जागरूकता और सतर्कता के माध्यम से गर्मी से जुड़े हृदय संबंधी जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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