मुंबई: ससुर ने दामाद को दी नई जिंदगी, मीरा रोड के वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स में जटिल किडनी ट्रांसप्लांट सफल।

मुंबई: ससुर ने दामाद को दी नई जिंदगी, मीरा रोड के वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स में जटिल किडनी ट्रांसप्लांट सफल।

अखिलेश चौबे 
मुंबई। रिश्तों की गहराई और मानवीय संवेदनाओं को दर्शाने वाली एक अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक घटना मुंबई में सामने आई है, जहां एक ससुर ने अपने दामाद को नया जीवन देने के लिए अपनी किडनी दान कर दी। यह दुर्लभ और जटिल किडनी प्रत्यारोपण Wockhardt Hospitals Mira Road में सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 39 वर्षीय मरीज लंबे समय से किडनी फेलियर की गंभीर समस्या से जूझ रहा था। वह मधुमेह (डायबिटीज) से भी पीड़ित था और लगातार डायलिसिस पर निर्भर था, जिससे उसका शारीरिक स्वास्थ्य काफी कमजोर हो चुका था। परिवार में उपयुक्त किडनी डोनर नहीं मिलने की स्थिति में 55 वर्षीय ससुर ने आगे बढ़कर अपनी किडनी दान करने का निर्णय लिया। उल्लेखनीय है कि दोनों के रक्त समूह अलग थे—डोनर का ब्लड ग्रुप एबी पॉजिटिव और मरीज का बी पॉजिटिव था, जिससे यह ट्रांसप्लांट और अधिक चुनौतीपूर्ण बन गया।
इस विषय पर जानकारी देते हुए डॉ. पुनीत भुवानिया, जो अस्पताल के नेफ्रोलॉजिस्ट एवं किडनी ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ हैं, ने बताया कि यह “एबीओ इनकम्पैटिबल किडनी ट्रांसप्लांट” का मामला था। इस प्रकार के प्रत्यारोपण में मरीज के शरीर में मौजूद एंटीबॉडी नई किडनी को अस्वीकार कर सकती हैं, जिससे संक्रमण और अन्य जटिलताओं का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है।
डॉ. भुवानिया के अनुसार, इस चुनौती से निपटने के लिए चिकित्सा टीम ने पहले “डिसेंसिटाइजेशन” प्रक्रिया अपनाई, जिसके माध्यम से मरीज के शरीर में एंटीबॉडी के स्तर को नियंत्रित किया गया। इसके पश्चात अत्यधिक सावधानी, सटीक योजना और सतत निगरानी के साथ सर्जरी को अंजाम दिया गया।
इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने वाली विशेषज्ञ टीम में डॉ. जयेश धाबालिया (कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट एवं ट्रांसप्लांट सर्जन), डॉ. प्रदीप प्रभाकर व्यावहारे (कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट, यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट एवं किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन), डॉ. प्रकाश तेजवानी (कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट एवं एंड्रोलॉजिस्ट) तथा डॉ. आशुतोष बघेल (कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट एवं रीनल ट्रांसप्लांट सर्जन) शामिल रहे। सभी विशेषज्ञों ने मिलकर सर्जरी के दौरान उच्च स्तर की सटीकता सुनिश्चित की तथा ऑपरेशन के बाद मरीज की समग्र देखभाल की।
ऑपरेशन के एक महीने के भीतर ही इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। मरीज अब डायलिसिस से पूरी तरह मुक्त हो चुका है, उसका वजन बढ़ रहा है और वह तेजी से सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है। वहीं, किडनी दान करने वाले ससुर भी पूर्णतः स्वस्थ हैं।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, यह सफलता आधुनिक चिकित्सा तकनीक, विशेषज्ञों की टीमवर्क और समय पर लिए गए उचित निर्णयों का परिणाम है। यह घटना केवल चिकित्सा विज्ञान की उपलब्धि ही नहीं, बल्कि पारिवारिक मूल्यों, त्याग और मानवीय संबंधों की गहराई का भी अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करती है।
आज के बदलते सामाजिक परिवेश में, जहां संयुक्त परिवारों की जगह एकल (न्यूक्लियर) परिवारों का प्रचलन बढ़ रहा है, यह घटना हमें भारतीय पारिवारिक मूल्यों की मजबूती का स्मरण कराती है। सामान्यतः औपचारिक माने जाने वाले ससुर-दामाद के संबंध को इस उदाहरण ने पिता-पुत्र के पवित्र रिश्ते में परिवर्तित कर दिया है, जहां एक व्यक्ति ने बिना किसी संकोच के अपने जीवन का अमूल्य हिस्सा दूसरे को समर्पित कर दिया।
यह प्रेरक कहानी यह संदेश देती है कि यदि हम अपने रिश्तों को समझें, उन्हें समय दें और सच्चे मन से निभाएं, तो परिवार की जड़ें और भी सुदृढ़ हो सकती हैं। यही भारतीय संस्कृति की वास्तविक पहचान है—जहां प्रेम, त्याग और एक-दूसरे के लिए हर सीमा तक जाने का जज्बा आज भी जीवित है।

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