पालघर: विराज प्रोफाइल्स के विस्तार को लेकर बवाल, ग्रामस्थों का विरोध और प्रशासन आमने-सामने।प्रदूषण, रोजगार और सुरक्षा पर उठे सवाल; जनसुनवाई रद्द न होने से बढ़ा आक्रोश, प्रेस वार्ता में आंदोलन तेज करने का ऐलान।
पालघर: विराज प्रोफाइल्स के विस्तार को लेकर बवाल, ग्रामस्थों का विरोध और प्रशासन आमने-सामने।
प्रदूषण, रोजगार और सुरक्षा पर उठे सवाल; जनसुनवाई रद्द न होने से बढ़ा आक्रोश, प्रेस वार्ता में आंदोलन तेज करने का ऐलान।
अखिलेश चौबे
पालघर। जिले के तारापुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित विराज प्रोफाइल्स के प्रस्तावित विस्तार और नियमितीकरण को लेकर बोईसर के मान एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में विरोध तेज हो गया है। स्थानीय ग्रामस्थों ने दो टूक कहा है कि यह परियोजना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी और जरूरत पड़ने पर सड़क से लेकर न्यायालय तक संघर्ष किया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सोमवार, 6 अप्रैल को दोपहर 12:30 बजे बोईसर के चित्रालय परिसर स्थित न्यू रेयांश होटल में विराज प्रोफाइल विरोधी समिति (मान व परिसर) एवं विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों द्वारा एक तात्कालिक पत्रकार परिषद आयोजित की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक भी मौजूद रहे, जहां आंदोलन की आगे की दिशा और रणनीति पर खुलकर चर्चा की गई।
गौरतलब है कि 4 अप्रैल 2026 को निकाले गए मोर्चे के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रस्तावित जनसुनवाई रद्द करने की मांग की थी। हालांकि, जनसुनवाई को रद्द न किए जाने से ग्रामीणों में आक्रोश और बढ़ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन उनकी चिंताओं को लगातार नजरअंदाज कर रहा है।
पत्रकार परिषद में ग्रामीणों ने औद्योगिक प्रदूषण को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि पिछले कई वर्षों से क्षेत्र में प्रदूषण के कारण पीने का पानी दूषित हो चुका है और श्वसन व त्वचा संबंधी बीमारियों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसके बावजूद संबंधित विभागों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
रोजगार के मुद्दे पर भी असंतोष सामने आया। ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी द्वारा स्थानीय लोगों को अपेक्षित रोजगार नहीं दिया गया, बल्कि हाल ही में कुछ कर्मचारियों की छंटनी भी की गई है। वहीं, फैक्ट्री से जुड़े भारी वाहनों की तेज रफ्तार आवाजाही से क्षेत्र में दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
ग्रामीणों ने प्रस्तावित जनसुनवाई से पहले व्यापक स्वास्थ्य जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि पहले क्षेत्र के लोगों की स्वास्थ्य स्थिति स्पष्ट की जाए, उसके बाद ही किसी प्रकार का निर्णय लिया जाए। साथ ही, जनसुनवाई प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की भी मांग की गई। बाहरी लोगों की भागीदारी को लेकर आशंका जताते हुए प्रशासन से सख्त निगरानी की अपील की गई है।
दूसरी ओर, प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत और पारदर्शिता के साथ संपन्न कराई जाएगी। संबंधित विभागों द्वारा पर्यावरणीय मानकों और सुरक्षा नियमों के पालन की बात भी दोहराई जा रही है।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि जिला स्तर के अधिकारी स्वयं परियोजना स्थल का दौरा करें और वहां उपयोग किए जा रहे रसायनों तथा सांडपानी शोधन संयंत्र (ETP) की जांच करें। साथ ही, इस निरीक्षण में ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए। यदि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है, तो मौजूदा प्रकल्प पर भी कार्रवाई की जाए।
फिलहाल, बोईसर में यह मुद्दा गंभीर रूप लेता जा रहा है। एक ओर ग्रामीण अपने स्वास्थ्य, पर्यावरण और अधिकारों को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए हैं, वहीं प्रशासन परियोजना की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद और तीखा होने के संकेत मिल रहे हैं।
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