पालघर/ मीरा रोड: वसई हमले में घायल 4 वर्षीय मासूम ने जीती जिंदगी की जंग, डॉक्टरों की मेहनत से स्वस्थ होकर लौटा घर।
पालघर/ मीरा रोड: वसई हमले में घायल 4 वर्षीय मासूम ने जीती जिंदगी की जंग, डॉक्टरों की मेहनत से स्वस्थ होकर लौटा घर।
अखिलेश चौबे
पालघर/ मीरा रोड। 30 मार्च को वसई क्षेत्र में चार वर्षीय मासूम विघ्नेश अतुल कोंढारे पर हुए अमानवीय हमले ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया था। इस घटना में आरोपी संदीप पवार द्वारा की गई बर्बरता ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया था। घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद आम नागरिकों में भारी आक्रोश देखने को मिला था और आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठी थी।
हमले में गंभीर रूप से घायल विघ्नेश को तुरंत वॉकहार्ट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई थी। आईसीयू में भर्ती इस मासूम के जीवन को बचाने के लिए डॉक्टरों की टीम ने दिन-रात प्रयास किए। प्रारंभिक जांच में सीटी स्कैन के माध्यम से यह सामने आया कि उसके मस्तिष्क में कई स्थानों पर रक्तस्राव हुआ था, जो गंभीर मस्तिष्क चोट का संकेत था।
उपचार कर रहे वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अंकित गुप्ता ने बताया कि बच्चे को “डिफ्यूज एक्सोनल इंजरी” जैसी गंभीर मस्तिष्क चोट लगी थी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तुरंत मस्तिष्क की सूजन कम करने हेतु एंटी-एडिमा उपचार शुरू किया गया, साथ ही दौरे रोकने के लिए एंटी-कन्वल्सेंट दवाएं दी गईं। लगातार निगरानी और समय पर उपचार के चलते बच्चे की स्थिति धीरे-धीरे स्थिर होती गई।
इलाज के दौरान बच्चे के दाहिने हाथ में कमजोरी भी देखी गई, जिसके लिए फिजियोथेरेपी और पुनर्वास की समग्र योजना लागू की गई। डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और रिहैबिलिटेशन टीम के संयुक्त प्रयासों से बच्चे की हालत में लगातार सुधार होता गया और उसकी चेतना तथा प्रतिक्रिया में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला।
अस्पताल के सेंटर हेड डॉ. सुशील कुमार ने इस मामले को चिकित्सा सेवा का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि यह केवल इलाज नहीं, बल्कि एक नन्हीं जिंदगी को बचाने की कहानी है। उन्होंने कहा कि टीमवर्क, समय पर उपचार और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के कारण ही यह संभव हो सका।
जहां एक ओर यह मामला जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष से शुरू हुआ था, वहीं अब यह उम्मीद और हौसले की मिसाल बन गया है। डॉक्टरों की अथक मेहनत और समर्पण के चलते विघ्नेश को सुरक्षित और स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और वह अब अपने घर लौट चुका है।
पीड़ित बच्चे के पिता अतुल कोंढारे ने इस दौरान डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने पहले आरोपी के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की मांग की थी और अब अपने बच्चे के स्वस्थ होने पर राहत जताई है।
यह घटना न केवल एक दर्दनाक अपराध की याद दिलाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि समय पर मिला सही उपचार, विशेषज्ञों की मेहनत और मानवीय संवेदनाएं मिलकर किसी भी कठिन परिस्थिति को आशा की कहानी में बदल सकती हैं।
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