पालघर: धनानी नगर विवाद: प्रशासन की देर से जागी कार्रवाई, नेताओं के वादे बेअसर और आम जनता की लापरवाही ने बढ़ाई त्रासदी30–35 वर्षों से बसे परिवार बेघर, अवैधता पर उठे सवाल— जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज।
पालघर: धनानी नगर विवाद: प्रशासन की देर से जागी कार्रवाई, नेताओं के वादे बेअसर और आम जनता की लापरवाही ने बढ़ाई त्रासदी
30–35 वर्षों से बसे परिवार बेघर, अवैधता पर उठे सवाल— जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज।
अखिलेश चौबे
पालघर। जिले के बोईसर क्षेत्र के धनानी नगर में हाल ही में हुई प्रशासनिक कार्रवाई के बाद इलाके में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस कार्रवाई के चलते 30 से 35 वर्षों से यहां निवास कर रहे कई परिवारों को अपने घर खाली करने पड़े, जिससे स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी व्याप्त है।
प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्होंने यह जमीन कई वर्ष पूर्व खरीदी थी और समय के साथ अपनी मेहनत से यहां पक्के मकान बनाकर स्थायी रूप से बस गए। उनका आरोप है कि जिस परिवार से उन्होंने जमीन खरीदी थी, अब वही लोग जमीन पर पुनः दावा कर उन्हें बेदखल करवा रहे हैं।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, जब उन्होंने जमीन खरीदी थी, तब इसे अवैध नहीं बताया गया था। ऐसे में अचानक की गई कार्रवाई ने उन्हें झकझोर कर रख दिया है। लोगों का यह भी सवाल है कि यदि जमीन अवैध थी, तो इतने वर्षों तक प्रशासन की ओर से बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं कैसे उपलब्ध कराई जाती रहीं। वे नियमित रूप से बिजली बिल और अन्य करों का भुगतान करते रहे, बावजूद इसके आज उन्हें बेघर होना पड़ा।
यह पूरा मामला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। आखिर इतने वर्षों तक प्रशासन की आंखें क्यों बंद रहीं? यदि भूमि अवैध थी, तो शुरुआती स्तर पर ही कार्रवाई क्यों नहीं की गई? अक्सर देखा जाता है कि अवैध निर्माण वर्षों तक जारी रहते हैं, उन पर बिजली-पानी के कनेक्शन दिए जाते हैं, यहां तक कि कई स्थानों पर बड़े निर्माण भी खड़े हो जाते हैं, लेकिन प्रशासन की सक्रियता तब दिखाई देती है जब लोग पूरी तरह बस चुके होते हैं। ऐसे में अचानक की गई कार्रवाई न केवल मानवीय संकट पैदा करती है, बल्कि प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवाल उठाती है।
वहीं, इस पूरे घटनाक्रम में राजनीतिक पहलू भी सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ समय पूर्व भाजपा के स्थानिक नेता और जनप्रतिनिधि क्षेत्र में आए थे और उन्होंने स्पष्ट आश्वासन दिया था कि किसी भी परिवार को बेघर नहीं होने दिया जाएगा। लेकिन कार्रवाई के समय उनका कहीं अता-पता नहीं रहा, जिससे लोगों में आक्रोश और अविश्वास और अधिक बढ़ गया है।
हालांकि, इस पूरे मामले में केवल प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को ही कटघरे में खड़ा करना पर्याप्त नहीं है। कहीं न कहीं आम जनता की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आज के समय में लोग फर्जी दस्तावेजों और अवैध जमीनों के जोखिम से भली-भांति परिचित होते हुए भी केवल सस्ते दाम के लालच में बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के जमीन खरीद लेते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी भूमि या संपत्ति को खरीदने से पहले विधिवत कानूनी जांच, दस्तावेजों का सत्यापन और वकील की सलाह लेना अत्यंत आवश्यक है। लेकिन अक्सर इस प्रक्रिया की अनदेखी की जाती है, जिसका खामियाजा बाद में इस तरह की घटनाओं के रूप में सामने आता है।
फिलहाल, धनानी नगर में कई परिवार खुले आसमान के नीचे जीवन यापन करने को मजबूर हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं। इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। यह मामला एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करता है कि प्रशासन, जनप्रतिनिधि और आम नागरिक—तीनों की जिम्मेदारी तय किए बिना इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका नहीं जा सकता।
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