पालघर: 19 साल की खामोशी टूटी: जटिल सर्जरी से बुजुर्ग को फिर मिली आवाज़।
पालघर: 19 साल की खामोशी टूटी: जटिल सर्जरी से बुजुर्ग को फिर मिली आवाज़।
अखिलेश चौबे
मुंबई। आवाज़ केवल बोलने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति की पहचान, भावनाओं और सामाजिक जुड़ाव का महत्वपूर्ण आधार होती है। जब किसी की आवाज़ चली जाती है, तो वह केवल शब्दों को नहीं, बल्कि अपनी अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास को भी खो देता है। ऐसे ही एक प्रेरणादायक मामले में मुंबई के मीरा रोड स्थित वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स में 73 वर्षीय एक बुजुर्ग को लगभग 19 वर्षों बाद उनकी आवाज़ वापस दिलाई गई है।
यह सफलता एक जटिल लेकिन सटीक सर्जरी के माध्यम से संभव हो सकी, जिसे कान-नाक-गला विशेषज्ञ एवं सिर-गर्दन कैंसर शल्य चिकित्सक डॉ. चंद्रवीर सिंह, ईएनटी विशेषज्ञ एवं सिर-गर्दन कैंसर शल्य चिकित्सक डॉ. शीतल राडिया और उनकी टीम ने अंजाम दिया।
जानकारी के अनुसार, मरीज ने वर्ष 2007 में चौगुनी हार्ट बायपास सर्जरी करवाई थी। इस सर्जरी ने उनकी जान तो बचा ली, लेकिन एक दुर्लभ जटिलता के कारण उनकी आवाज़ चली गई। गले की महत्वपूर्ण नस (लेफ्ट रिकरेंट लेरिंजियल नर्व) को नुकसान पहुंचने से उनका एक वोकल कॉर्ड निष्क्रिय हो गया। इसके परिणामस्वरूप उनकी आवाज़ बेहद धीमी और कमजोर हो गई, बोलते समय जल्दी थकान होने लगी और निगलने में भी कठिनाई आने लगी।
करीब दो दशकों तक यह समस्या उनकी दिनचर्या का हिस्सा बनी रही। इस दौरान मरीज को किडनी रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, शरीर और फेफड़ों में पानी भरने जैसी गंभीर बीमारियां भी थीं, जिससे उनका इलाज और अधिक जटिल हो गया। सामान्य बेहोशी देकर सर्जरी करना उनके लिए अत्यंत जोखिमपूर्ण था।
ऐसी परिस्थिति में डॉक्टरों की टीम ने ‘अवेक टाइप-1 थायरोप्लास्टी’ तकनीक का चयन किया। इस प्रक्रिया में मरीज को पूरी तरह बेहोश नहीं किया जाता, बल्कि स्थानीय एनेस्थीसिया के तहत सर्जरी की जाती है।
सर्जरी के दौरान गले की थायरॉइड कार्टिलेज में एक छोटा सा मार्ग बनाकर विशेष इम्प्लांट लगाया गया, जिससे निष्क्रिय वोकल कॉर्ड को बीच की ओर लाया जा सके। इससे स्वस्थ वोकल कॉर्ड के साथ उसका संपर्क स्थापित हुआ और आवाज़ सामान्य रूप से निकलने लगी। इस पूरी प्रक्रिया की सबसे विशेष बात यह रही कि मरीज ऑपरेशन के दौरान पूरी तरह जागृत था। डॉक्टर उसी समय उसकी आवाज़ सुनते हुए इम्प्लांट की स्थिति को सटीक रूप से समायोजित करते रहे, जिससे सर्वोत्तम परिणाम सुनिश्चित हो सके।
इस जटिल सर्जरी में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. रोहित कटेलिया की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उन्होंने पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज की स्थिति को स्थिर और सुरक्षित बनाए रखा।
डॉ. चंद्रवीर सिंह ने बताया कि हार्ट सर्जरी के बाद आवाज़ का जाना एक दुर्लभ स्थिति है, लेकिन इसका व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। कई लोग इसे अपनी नियति मान लेते हैं, जबकि आधुनिक चिकित्सा में इसके समाधान संभव हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति की आवाज़ दो से तीन सप्ताह से अधिक समय तक बैठी रहे, बोलने में थकान हो या आवाज़ असामान्य रूप से कमजोर लगे, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और उपचार से जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है।
यह मामला केवल एक सफल सर्जरी का उदाहरण नहीं है, बल्कि यह उम्मीद, धैर्य और आधुनिक चिकित विज्ञान की प्रगति का प्रतीक भी है, जिसने एक व्यक्ति को वर्षों की खामोशी के बाद फिर से अपनी आवाज़ लौटाई।
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