पालघर: बोईसर में यूरिया घोटाले का पर्दाफाश: सब्सिडी वाली खाद को ‘तकनीकी ग्रेड’ बताकर उद्योगों में खपाने का खेल उजागर।पुलिस की कार्रवाई में 11,300 किलोग्राम यूरिया जब्त, चार आरोपी गिरफ्तार — संगठित रैकेट की आशंका।
पालघर: बोईसर में यूरिया घोटाले का पर्दाफाश: सब्सिडी वाली खाद को ‘तकनीकी ग्रेड’ बताकर उद्योगों में खपाने का खेल उजागर।
पुलिस की कार्रवाई में 11,300 किलोग्राम यूरिया जब्त, चार आरोपी गिरफ्तार — संगठित रैकेट की आशंका।
अखिलेश चौबे
पालघर। जिले के बोईसर क्षेत्र में कृषि के लिए रियायती दरों पर उपलब्ध यूरिया उर्वरक के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस प्रकरण में बोईसर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुल 11,300 किलोग्राम (226 बोरी) यूरिया जब्त किया है, जिसे कथित रूप से ‘तकनीकी ग्रेड’ के नाम पर औद्योगिक उपयोग के लिए अवैध रूप से बेचा जा रहा था। मामले में चार लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर उन्हें हिरासत में लिया गया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, 25 मार्च 2026 को बोईसर एमआईडीसी क्षेत्र में गश्त के दौरान एक संदिग्ध टेम्पो (क्रमांक MH-48-DQ-6465) खड़ा दिखाई दिया। संदेह के आधार पर वाहन की जांच की गई, जिसमें 50-50 किलोग्राम की कुल 226 बोरियां बरामद हुईं। इन बोरियों पर ‘तकनीकी ग्रेड – औद्योगिक उपयोग’ अंकित था, जिससे प्रथम दृष्टया यह दर्शाया जा रहा था कि यह माल उद्योगों के लिए है।
हालांकि, जब चालक से आवश्यक दस्तावेज मांगे गए तो वह कोई वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका। इससे पुलिस का संदेह और गहरा गया, जिसके बाद विस्तृत जांच प्रारंभ की गई।
जांच के दौरान इस अवैध कारोबार में टेम्पो चालक समाधान संजय शेल्के, टेम्पो मालिक जितेंद्र पश्ते, वितरक राजेंद्र गीते तथा बोईसर निवासी संकेत सावंत की संलिप्तता उजागर हुई। पुलिस ने चारों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया और न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
प्राथमिक जांच एवं कृषि विभाग की रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि जब्त किया गया यूरिया मूलतः किसानों के लिए सब्सिडी पर उपलब्ध कराया गया था। आरोप है कि इसे नियमों का उल्लंघन करते हुए ‘तकनीकी ग्रेड’ का नाम देकर औद्योगिक इकाइयों को ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा था। इस तरह की अवैध गतिविधि से न केवल सरकारी नीतियों को क्षति पहुंचती है, बल्कि किसानों को मिलने वाली आवश्यक खाद की आपूर्ति भी प्रभावित होती है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह कोई साधारण मामला नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जो लंबे समय से सक्रिय है। फिलहाल पुलिस इस पूरे रैकेट की कड़ियां जोड़ने में जुटी है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यूरिया की आपूर्ति किन-किन औद्योगिक इकाइयों तक की जा रही थी तथा इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में हो रहे इस तरह के दुरुपयोग पर बड़ा प्रहार संभव है।
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