मुंबई: विमाधारक को केंद्र में रखकर सेवाएँ दें बीमा कंपनियाँ और अस्पताल : स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर।

मुंबई: विमाधारक को केंद्र में रखकर सेवाएँ दें बीमा कंपनियाँ और अस्पताल : स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर।

अखिलेश चौबे
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार के सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री प्रकाश आबिटकर ने कहा है कि स्वास्थ्य बीमा से जुड़े सभी मामलों में रोगी और विमाधारक को केंद्र में रखकर ही बीमा कंपनियों तथा अस्पतालों को अपनी सेवाएँ प्रदान करनी चाहिए। बीमा दावा स्वीकृति में आने वाली कठिनाइयों तथा निजी अस्पतालों द्वारा लिए जाने वाले अत्यधिक चिकित्सा शुल्क की शिकायतों के संदर्भ में मंत्रालय में एक संयुक्त बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण, विभिन्न निजी बीमा कंपनियों तथा प्रमुख निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने बैठक में स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि बीमा कंपनियाँ और अस्पताल भले ही व्यावसायिक रूप से कार्य करते हों, किंतु चिकित्सा व्यवस्था का मुख्य केंद्र रोगी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि रोगी को समय पर उपचार और बीमा लाभ मिलना सबसे महत्वपूर्ण है और इसमें किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए।
बैठक में बीमा दावों की स्वीकृति में होने वाली देरी, प्रक्रियाओं में आने वाली कठिनाइयों तथा निजी अस्पतालों द्वारा वसूले जाने वाले अत्यधिक चिकित्सा शुल्क के विषय में विस्तार से चर्चा की गई। इन समस्याओं के समाधान के लिए एक निश्चित कार्यपद्धति निर्धारित करने पर विचार किया गया, जिससे विमाधारकों को पारदर्शी और संतोषजनक सेवा मिल सके।
इस बैठक में रिलायंस, टाटा, भारतीय स्टेट बैंक, स्टार हेल्थ, एचडीएफसी तथा एआईजी जैसी प्रमुख बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त वॉकहार्ट अस्पताल, लीलावती अस्पताल, जसलोक अस्पताल तथा रिलायंस अस्पताल सहित राज्य के प्रमुख निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि देश में स्वास्थ्य बीमा लेने वाले लोगों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। ऐसे में बीमा कंपनियों और अस्पतालों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे विमाधारकों को संतोषजनक और गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ प्रदान करें। यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या शिकायत सामने आती है तो राज्य सरकार उस पर आवश्यक कार्रवाई करेगी।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे बड़े शहरों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ, विशेषज्ञ चिकित्सक तथा मजबूत आधारभूत संरचना उपलब्ध है। इसी कारण राज्य में चिकित्सा पर्यटन की संभावनाएँ भी तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने अस्पतालों और बीमा कंपनियों से बेहतर सेवा देकर अपनी विश्वसनीयता बढ़ाने का आह्वान किया।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि राज्य के सभी अस्पताल भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण के पोर्टल पर अनिवार्य रूप से पंजीकरण करें और अपनी आवश्यक जानकारी समय-समय पर अद्यतन रखें। साथ ही बीमा दावों की स्वीकृति के लिए एक निश्चित समय सीमा निर्धारित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
उन्होंने कहा कि कई बार अस्पतालों और बीमा कंपनियों के बीच समन्वय की कमी के कारण रोगियों को मानसिक तथा आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसलिए सरकार ऐसी व्यवस्था बनाने की दिशा में कार्य कर रही है, जिससे रोगियों को समय पर उपचार प्राप्त हो सके और बीमा दावा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी तथा सरल बन सके।
स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार राज्य में वर्तमान समय में लगभग सात से आठ हजार अस्पताल बीमा सेवा प्रदान कर रहे हैं। इनमें से कुछ स्थानों पर अनियमितताओं की शिकायतें सरकार के पास प्राप्त हुई हैं। ऐसे मामलों में बॉम्बे नर्सिंग अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही बड़े अस्पतालों के लिए उपचार से संबंधित शुल्क का स्पष्ट विवरण दर्शाने वाला दरपत्रक प्रदर्शित करना अनिवार्य करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई। यह भी सामने आया कि एक ही बीमारी के उपचार के लिए विभिन्न अस्पतालों में अलग-अलग शुल्क लिए जाते हैं। इस स्थिति को देखते हुए मानक उपचार पद्धति निर्धारित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। साथ ही बीमा कंपनियों और अस्पतालों के लिए एक समान मान्यता प्रणाली स्थापित करने के विषय में भी विचार किया जा रहा है।
बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि स्वीकृत तथा अस्वीकृत बीमा दावों और प्राप्त शिकायतों की जानकारी नियमित रूप से स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी। भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण द्वारा महाराष्ट्र से प्राप्त शिकायतों का अध्ययन कर उनके समाधान के लिए आवश्यक उपाय किए जाएंगे। इस प्रकार की व्यवस्था लागू करने वाला महाराष्ट्र देश का पहला राज्य बनने जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने स्पष्ट किया कि चिकित्सा सेवा व्यवस्था में विश्वास और पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी रोगी को उपचार प्राप्त करने या बीमा दावा मिलने में कठिनाई नहीं होनी चाहिए और इसके लिए राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस बैठक में स्वास्थ्य सेवा आयुक्त डॉ. कादंबरी बलकवड़े, स्वास्थ्य निदेशक डॉ. नितीन अंबाडेकर, सहनिदेशक डॉ. सुनीता गोल्हाइत सहित सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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