मुंबई: चौंकाने वाला आंकड़ा: किडनी रोगियों की संख्या में चीन पहले, भारत दूसरे स्थान पर।

मुंबई: चौंकाने वाला आंकड़ा: किडनी रोगियों की संख्या में चीन पहले, भारत दूसरे स्थान पर।

अखिलेश चौबे 
मुंबई। प्रतिवर्ष 12 मार्च को मनाए जाने वाले विश्व किडनी दिवस के अवसर पर मुंबई के चिकित्सकों ने नागरिकों से किडनी के स्वास्थ्य को गंभीरता से लेने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता, समय पर चिकित्सकीय जांच तथा संतुलित और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर किडनी से संबंधित कई गंभीर रोगों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
इस वर्ष विश्व किडनी दिवस का वैश्विक विषय “सभी के लिए किडनी स्वास्थ्य : लोगों की देखभाल और पृथ्वी की सुरक्षा” रखा गया है। इस विषय का उद्देश्य किडनी रोगों की रोकथाम, समय पर उपचार तथा प्रत्येक रोगी को समान रूप से स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल देना है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार भारत में दीर्घकालिक किडनी रोग तेजी से बढ़ती हुई सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार देश में लगभग तेरह करोड़ अस्सी लाख लोग किसी न किसी प्रकार की किडनी संबंधी बीमारी से प्रभावित हो सकते हैं। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा तथा शारीरिक गतिविधियों की कमी जैसे कारणों ने भारतीय नागरिकों में गुर्दों को क्षति पहुँचने का खतरा और अधिक बढ़ा दिया है।
एक वैश्विक अध्ययन के अनुसार वर्ष 2023 में गुर्दा रोगियों की संख्या के मामले में भारत विश्व में दूसरे स्थान पर रहा, जहाँ लगभग तेरह करोड़ अस्सी लाख लोग इस बीमारी से प्रभावित बताए गए हैं। इस सूची में चीन पहले स्थान पर है, जहाँ लगभग पंद्रह करोड़ बीस लाख लोग दीर्घकालिक गुर्दा रोग से जूझ रहे हैं।
चिकित्सकों के अनुसार गुर्दे मानव शरीर के अत्यंत महत्वपूर्ण अंग हैं। ये शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने, शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने, रक्तचाप को नियंत्रित करने तथा लाल रक्त कणों के निर्माण में सहायता करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। किंतु गुर्दा रोग को प्रायः मूक रोग भी कहा जाता है, क्योंकि कई बार रोगी को तब तक कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते जब तक गुर्दों की लगभग पचास प्रतिशत कार्यक्षमता कम नहीं हो जाती।
इस अवसर पर मीरा रोड स्थित वॉकहार्ट अस्पताल के परामर्शदाता गुर्दा रोग विशेषज्ञ तथा प्रत्यारोपण चिकित्सक डॉ. पुनीत भुवानिया ने कहा कि गुर्दों की बीमारी प्रायः बिना स्पष्ट लक्षणों के धीरे-धीरे बढ़ती है और अनेक रोगियों को इसका पता तब चलता है जब रोग काफी आगे बढ़ चुका होता है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा अथवा परिवार में गुर्दा रोग का इतिहास है, उन्हें नियमित रूप से अपनी जांच अवश्य करानी चाहिए। समय पर जांच से रोग का प्रारंभिक अवस्था में पता लगाया जा सकता है और गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
डॉ. पुनीत भुवानिया ने यह भी बताया कि गुर्दों की सेहत को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी उपाय रोग की रोकथाम है। इसके लिए नियमित शारीरिक गतिविधि करना, रक्त शर्करा और रक्तचाप की नियमित निगरानी रखना, भोजन में नमक का सीमित उपयोग करना, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, धूम्रपान से दूर रहना तथा चिकित्सक की सलाह के बिना लंबे समय तक दर्द निवारक औषधियों का सेवन न करना अत्यंत आवश्यक है।
मुंबई के एपेक्स समूह अस्पतालों के गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित जैन ने युवाओं में बढ़ती गुर्दा समस्याओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज कम आयु में गुर्दा संबंधी रोगों का सामने आना चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने कहा कि अनेक युवा अनजाने में अस्वस्थ जीवनशैली के कारण अपने गुर्दों को नुकसान पहुँचा रहे हैं। अधिक मात्रा में जंक फूड का सेवन, भोजन में अत्यधिक नमक, मीठे पेय पदार्थों का उपयोग, पर्याप्त पानी न पीना, व्यायाम की कमी तथा दर्द निवारक औषधियों या पूरक दवाओं का गलत उपयोग धीरे-धीरे गुर्दों को नुकसान पहुँचाता है।
उन्होंने कहा कि गुर्दों पर होने वाला यह प्रभाव कई वर्षों तक बिना किसी लक्षण के जारी रह सकता है, इसलिए बचाव की आदतें कम आयु से ही अपनाना आवश्यक है। यदि समय पर जांच कराई जाए और जीवनशैली में आवश्यक सुधार किया जाए तो गुर्दा रोग की प्रगति को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है तथा भविष्य में डायलिसिस या गुर्दा प्रत्यारोपण की आवश्यकता को भी कम किया जा सकता है।
विश्व गुर्दा दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने गुर्दों की नियमित जांच कराएँ, संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली अपनाएँ तथा स्वास्थ्य के प्रति सजग रहकर इस गंभीर बीमारी से स्वयं को सुरक्षित रखें।

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