पालघर: कोकण विभाग में भगवान बिरसा कला संगम कार्यक्रम उत्साहपूर्वक संपन्न।
पालघर: कोकण विभाग में भगवान बिरसा कला संगम कार्यक्रम उत्साहपूर्वक संपन्न।
अखिलेश चौबे
पालघर। प्रगति प्रतिष्ठान, जव्हार में महाराष्ट्र शासन के आदिवासी विकास विभाग तथा भगवान बिरसा कला मंच के संयुक्त तत्वावधान में आदिवासी कलाकारों के लिए भगवान बिरसा कला संगम कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जो अत्यंत उत्साह और सांस्कृतिक जोश के साथ संपन्न हुआ।
आदिवासी समाज अपनी महान संस्कृति, परंपरा और विविध लोककलाओं के माध्यम से हजारों वर्षों से अपनी पहचान बनाए हुए है। महाराष्ट्र की 47 जनजातियों की अपनी-अपनी विशिष्ट कलाएं हैं — नृत्य, गायन, वाद्य वादन, चित्रकला और हस्तकला — जो सण, विवाह, ग्रामदेवता उत्सव, देवी जागरण जैसे अवसरों पर प्रस्तुत की जाती हैं।
आज के समय में अनेक आदिवासी युवा सोशल मीडिया, रील्स, डॉक्यूमेंट्री और फोटोग्राफी के माध्यम से अपनी पारंपरिक कलाओं को जन-जन तक पहुँचा रहे हैं। इन्हीं कला परंपराओं को राज्यस्तरीय मंच प्रदान करने, इनका व्यवस्थित दस्तावेजीकरण करने और विश्व पटल पर प्रदर्शित करने के उद्देश्य से भगवान बिरसा कला मंच निरंतर कार्य कर रहा है।
महाराष्ट्र शासन के आदिवासी विकास विभाग के सहयोग से मंच ने पांच प्रमुख पारंपरिक कला विधाओं — नृत्य, गायन, वाद्य वादन, चित्रकला और हस्तकला — के लिए राज्यव्यापी प्रतियोगिता का आयोजन किया है। भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में इस प्रतियोगिता को भगवान बिरसा कला संगम नाम दिया गया है।
यह प्रतियोगिता जुलाई 2025 में प्रारंभ हुई थी, जिसमें अब तक महाराष्ट्र भर से 10,000 से अधिक कलाकारों ने विभिन्न श्रेणियों में अपनी सहभागिता दर्ज कराई है। इन कलाकारों ने अपनी कला से संबंधित सामग्री भी ऑनलाइन अपलोड की है। प्रतियोगिता का दूसरा चरण महाराष्ट्र के पांच विभागों में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें कोकण विभाग का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
कोकण क्षेत्रीय चरण में 400 से अधिक कलाकारों ने नृत्य, गायन, वाद्य वादन, चित्रकला और हस्तकला के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम की शुरुआत ‘हिरवा देव’, ‘धरतरी माता’ और ‘भगवान बिरसा मुंडा’ की पूजा-अर्चना के साथ हुई।
इस चरण में चयनित कलाकार अब आगामी 15 नवम्बर को भगवान बिरसा मुंडा जयंती एवं जनजाती गौरव दिवस के मुख्य राज्यस्तरीय कार्यक्रम में अपनी कला प्रस्तुत करेंगे। इस प्रतियोगिता के माध्यम से न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश को आदिवासी संस्कृति और उनकी अद्भुत कलात्मक परंपराओं का सजीव दर्शन हो रहा है।
भगवान बिरसा कला मंच ने भविष्य में भी आदिवासी कला और संस्कृति की सेवा व संरक्षण हेतु निरंतर कार्य करते रहने का संकल्प व्यक्त किया।
कार्यक्रम के अवसर पर प्रगति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष पुरुषोत्तम आगवण, आदिवासी एकता मित्र मंडल के संस्थापक अध्यक्ष संतोष जनाठे, जनजाती विकास मंच के संस्थापक अध्यक्ष नरेश मराड, वरिष्ठ कलाकार हरेश्वर वनगा तथा मुंबई विश्वविद्यालय के कला विषय के प्राध्यापक सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।
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