पालघर: तारापुर परमाणु ऊर्जा केंद्र की यूनिट-1 पुनः राष्ट्रीय ग्रिड से जुड़ी, स्वच्छ ऊर्जा को मिला नया बल।

पालघर: तारापुर परमाणु ऊर्जा केंद्र की यूनिट-1 पुनः राष्ट्रीय ग्रिड से जुड़ी, स्वच्छ ऊर्जा को मिला नया बल।

अखिलेश चौबे
पालघर। जिले स्थित Tarapur Atomic Power Station की यूनिट-1 ने व्यापक संयंत्र आयु-वृद्धि कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूर्ण करने के बाद पुनः राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड से जुड़ने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। देश के परमाणु ऊर्जा इतिहास में इसे एक महत्वपूर्ण और युगांतकारी उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे भारत की स्वच्छ तथा सतत ऊर्जा नीति को नई गति प्राप्त होगी।
Nuclear Power Corporation of India Limited के अधीन संचालित इस परियोजना में अंतरराष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा मानकों के अनुरूप उन्नत सुरक्षा व्यवस्थाएं और तकनीकी सुधार लागू किए गए हैं, जिससे संयंत्र की दीर्घकालिक विश्वसनीयता और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित हुआ है। वर्ष 1969 में प्रारंभ हुई तारापुर परमाणु ऊर्जा केंद्र की यूनिट-1 और यूनिट-2, पूर्व सोवियत संघ के बाहर एशिया की पहली परमाणु ऊर्जा रिएक्टर इकाइयों में शामिल रही हैं। पांच दशकों से अधिक समय तक सुरक्षित संचालन के बाद भी इनकी कार्यक्षमता को आधुनिक स्वरूप में सुदृढ़ किया गया है।
वर्ष 2020 में नवाचार, आधुनिकीकरण तथा समयजनित प्रभावों के प्रबंधन के उद्देश्य से दोनों इकाइयों को अस्थायी रूप से बंद किया गया था। कठोर नियामक निगरानी में किए गए कार्यों के दौरान अनेक महत्वपूर्ण तकनीकी सुधार लागू किए गए, जिनमें उन्नत जंग-रोधी सामग्री का उपयोग करते हुए रिएक्टर पुनर्चक्रण पाइपिंग का पूर्ण प्रतिस्थापन, त्रि-आयामी लेजर स्कैनिंग तकनीक द्वारा संरचना का सटीक मूल्यांकन, टर्बाइन-जनरेटर प्रणाली का व्यापक नवीनीकरण तथा विद्युत प्रणालियों का संपूर्ण उन्नयन शामिल है। इन सभी उपायों के परिणामस्वरूप संयंत्र की संरचनात्मक मजबूती पुनर्स्थापित हुई है और दीर्घकाल तक सुरक्षित, स्थिर तथा विश्वसनीय संचालन सुनिश्चित हो गया है।
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तारापुर परमाणु ऊर्जा केंद्र की यूनिट-2 में समानांतर रूप से चल रहे कार्य अंतिम चरण में हैं और उसे भी शीघ्र ही राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ दिया जाएगा। इस जटिल और उच्च तकनीकी परियोजना का सफल क्रियान्वयन एनपीसीआईएल की अभियांत्रिकी दक्षता, नवोन्मेषी दृष्टिकोण और संस्थागत क्षमता का प्रमाण माना जा रहा है। यूनिट-1 और यूनिट-2 विश्व की सबसे पुरानी संचालित परमाणु रिएक्टर इकाइयों में गिनी जाती हैं, जिनके पुनरुद्धार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है।
तारापुर की यूनिट-1 और यूनिट-2 ने अब तक एक लाख मिलियन यूनिट से अधिक स्वच्छ विद्युत उत्पादन करते हुए लगभग 86 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य उत्सर्जन को रोकने में योगदान दिया है। बढ़ती ऊर्जा मांग और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच यह उपलब्धि अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यूनिट-1 के पुनः संचालन से देश की विद्युत आपूर्ति क्षमता मजबूत होगी तथा स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की प्रगति को नया आधार मिलेगा।

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