पालघर: तारपा संस्कृति से पालघर ने परंपरा संजोई।भिकल्या धिंडा को पद्मश्री, कलेक्टर इंदु रानी जाखड़ ने दी शुभकामनाएं।

पालघर: तारपा संस्कृति से पालघर ने परंपरा संजोई।
भिकल्या धिंडा को पद्मश्री, कलेक्टर इंदु रानी जाखड़ ने दी शुभकामनाएं।

अखिलेश चौबे
पालघर। “अपनी परंपरा और संस्कृति को संजोना ही मेरा जीवन है। तारपा के नाद से मैंने देवताओं की आराधना की और उसी का फल मुझे मिला,” इन भावुक शब्दों में पालघर जिले के वालवंडा गांव निवासी वरिष्ठ आदिवासी तारपा वादक भिकल्या धिंडा ने अपने जीवन की अनुभूतियां व्यक्त कीं। उनकी इसी तपस्वी सांस्कृतिक साधना को सम्मान देते हुए भारत सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की है। इस घोषणा से धिंडा परिवार सहित पूरे पालघर जिले में खुशी का माहौल है।
भिकल्या धिंडा वर्तमान में 92 वर्ष के हैं और वे मात्र दस वर्ष की आयु से तारपा वादन कर रहे हैं। यह कला उनके परिवार में लगभग 400 वर्षों से चली आ रही वंशानुगत परंपरा का हिस्सा है। आदिवासी संस्कृति का प्रतीक माने जाने वाले तारपा वाद्य को उन्होंने केवल बजाया ही नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाकर सहेजा। देव पूजा, पर्व-त्योहार, सामाजिक कार्यक्रमों और उत्सवों में उन्होंने तारपा के स्वर से आदिवासी जीवनशैली को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
एक उत्कृष्ट तारपा वादक के रूप में भिकल्या धिंडा की पहचान दूर-दूर तक है। उन्हें यह कला अपने पिता से विरासत में मिली, जिसे उन्होंने तारपा निर्माण और वादन – दोनों माध्यमों से आगे बढ़ाया। लगभग दस फीट लंबे तारपा वाद्य को बजाना उनकी विशेष पहचान है। अब तक वे राज्य और देश के अनेक स्थानों पर अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर चुके हैं। विशेष बात यह है कि उन्होंने कई युवाओं को तारपा वादन का प्रशिक्षण देकर इस परंपरा को आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाया है। वे स्वयं तारपा का निर्माण कर अपने जीवनयापन का साधन भी बनाते हैं।
पद्मश्री पुरस्कार की घोषणा के बाद पालघर जिले की जिलाधिकारी डॉक्टर इंदु रानी जाखड़ ने भिकल्या धिंडा को शुभकामनाएं देते हुए उनका अभिनंदन किया। उन्होंने कहा,
“आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए भिकल्या धिंडा ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया है। उनका यह सम्मान पूरे पालघर जिले के लिए गर्व का विषय है।”
आदिवासी लोककला के इस जीवंत धरोहर को जीवनभर निस्वार्थ भाव से सहेजने वाले भिकल्या धिंडा को पद्मश्री पुरस्कार मिलने से पालघर जिले और आदिवासी समाज में हर्ष की लहर है। उनके योगदान के कारण तारपा वाद्य और आदिवासी संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है, ऐसा जिलाधिकारी डॉक्टर इंदु रानी जाखड़ ने बताया।

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