मुंबई: कोल्हापुरी चप्पलों के वैश्विक प्रसार के लिए प्राडा, लिडकॉम और लिडकार के बीच समझौता ज्ञापन।"पारंपरिक कोल्हापुरी कारीगरी को प्राडा का आधुनिक सहयोग"

मुंबई: कोल्हापुरी चप्पलों के वैश्विक प्रसार के लिए प्राडा, लिडकॉम और लिडकार के बीच समझौता ज्ञापन।
"पारंपरिक कोल्हापुरी कारीगरी को प्राडा का आधुनिक सहयोग"

अखिलेश चौबे 
मुंबई। भारतीय पारंपरिक चमड़ा शिल्प की पहचान कोल्हापुरी चप्पलों की विरासत को विश्व स्तर पर पहुंचाने के उद्देश्य से वैश्विक फैशन ब्रांड प्राडा, लिडकॉम (संत रोहिदास चमड़ा उद्योग एवं चमड़ाकार विकास महामंडल) और लिडकार (डॉ. बाबू जगजीवनराम चमड़ा उद्योग विकास महामंडल) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता मुंबई स्थित इटालियन वाणिज्य दूतावास में आयोजित इटली–भारत व्यापार परिषद के अवसर पर संपन्न हुआ।
इस साझेदारी के अंतर्गत शताब्दियों से प्रचलित पारंपरिक कोल्हापुरी चप्पल निर्माण की तकनीकों को प्राडा की आधुनिक और समकालीन डिजाइन शैली के साथ विकसित किया जाएगा। पारंपरिक शिल्प और आधुनिक लक्ज़री फैशन के समन्वय से कोल्हापुरी कारीगरी को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिलेगी। यह विशेष चप्पल संग्रह फरवरी 2026 से प्राडा के 40 अंतरराष्ट्रीय बिक्री केंद्रों तथा आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होगा।
इस पहल को महाराष्ट्र सरकार का सशक्त समर्थन प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री अजित पवार, सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट तथा सामाजिक न्याय राज्य मंत्री माधुरी मिसाल के मार्गदर्शन में यह समझौता साकार हुआ। यह करार प्रधान सचिव तथा लिडकॉम के अध्यक्ष डॉ. हर्षदीप कांबले के मार्गदर्शन और लिडकॉम की प्रबंध निदेशक प्रेरणा देशभ्रतार के रणनीतिक नियोजन से संभव हो सका।

सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने कहा कि इस समझौते से देशभर के कारीगरों, व्यवसायियों और उद्यमियों को लाभ होगा। इस विशेष संग्रह के माध्यम से भारतीय कारीगरों की कला को नई दिशा मिलेगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान और अधिक सुदृढ़ होगी।
लिडकॉम की प्रबंध निदेशक प्रेरणा देशभ्रतार ने कहा कि पारंपरिक कला को संरक्षित रखने वाले कारीगरों की पीढ़ियों का सम्मान करने और उनकी कारीगरी को वैश्विक स्तर पर उचित पहचान दिलाने के लिए यह साझेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक वैश्विक ब्रांड द्वारा महाराष्ट्र और कर्नाटक के कारीगरों के साथ प्रत्यक्ष सहयोग से उनकी कला को उचित श्रेय और पहचान प्राप्त होगी।
लिडकार की प्रबंध निदेशक डॉ. के. एम. वसुंधरा ने कहा कि कोल्हापुरी चप्पलों की परंपरा महाराष्ट्र और कर्नाटक के चप्पल कारीगरों की शताब्दियों पुरानी विरासत है। इस सहयोग से प्रशिक्षण, रोजगार और वैश्विक अवसरों के नए द्वार खुलेंगे।
प्राडा समूह के सामाजिक उत्तरदायित्व विभाग के प्रमुख लोरेंजो बर्टेली ने कहा कि यह साझेदारी सांस्कृतिक आदान-प्रदान की एक नई पहचान है। भारतीय कारीगरों की अद्वितीय कला को आधुनिक वैश्विक मंच पर उचित स्थान दिलाने के लिए प्राडा पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस समझौते में ‘प्राडा मेड इन इंडिया – इंस्पायर्ड बाय कोल्हापुरी चप्पल्स’ परियोजना की रूपरेखा, क्रियान्वयन प्रक्रिया और मार्गदर्शक सिद्धांतों को स्पष्ट किया गया है। महाराष्ट्र और कर्नाटक के पारंपरिक कोल्हापुरी चप्पल बनाने वाले कुशल कारीगरों की सहायता से इन चप्पलों का निर्माण भारत में किया जाएगा। पारंपरिक निर्माण तकनीकों, प्राडा की समकालीन डिजाइनों और प्रीमियम गुणवत्ता की सामग्री के माध्यम से यह संग्रह भारतीय सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक लक्ज़री फैशन के बीच एक नया संवाद स्थापित करेगा।
उल्लेखनीय है कि पारंपरिक कोल्हापुरी चप्पलों का निर्माण महाराष्ट्र के चार जिलों—कोल्हापुर, सांगली, सातारा और सोलापुर—तथा कर्नाटक के चार जिलों—बेलगावी, बागलकोट, धारवाड़ और बीजापुर—में किया जाता है। वर्ष 2019 में कोल्हापुरी चप्पलों को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त हुआ, जिससे उनकी प्रामाणिकता सुरक्षित हुई और उनका सांस्कृतिक महत्व और अधिक सशक्त हुआ।

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