पालघर: अज्ञात शव की पहचान से खुला हत्या का राज, पुलिस ने पाँच आरोपियों को किया गिरफ्तार।

पालघर: अज्ञात शव की पहचान से खुला हत्या का राज, पुलिस ने पाँच आरोपियों को किया गिरफ्तार।

अखिलेश चौबे 
पालघर। जिले में एक अज्ञात शव मिलने से शुरू हुई जांच ने धीरे-धीरे एक संगठित व योजनाबद्ध हत्या का बड़ा मामला उजागर कर दिया। पुलिस की तांत्रिक दक्षता, सतत चौकशी और दूरदर्शी तपास से न केवल मृतक की पहचान हुई, बल्कि हत्या की पूरी साजिश का भंडाफोड़ कर पाँचों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए।
12 जुलाई 2025 को कसारा पुलिस थाना (जिला नाशिक) को सूचना मिली कि मोखाडा पुलिस थाना क्षेत्र में वैतरणा धरण के पुल के पास एक अज्ञात पुरुष का शव पड़ा है।
खोडाळा दुरक्षेत्र के अंमलदार तुरंत मौके पर पहुँचे और वहाँ एक युवक का शव मिला जिसके दोनों पैर जंगली वेलों से कसकर बाँधे गए थे। पहला अनुमान अकस्मात मृत्यु का था, और मोखाडा पुलिस थाना ने अ.मृ. रजिस्टर क्रमांक 23/2025 के तहत मामला दर्ज किया।
गहन जांच के बाद शव की पहचान शरद कोंडाजी बोडके (आयु 31 वर्ष), निवासी मोहाळे, ता. इगतपुरी, जि. नाशिक के रूप में हुई। पैर बाँधने की स्थिति, शरीर की अवस्था और परिजनों के बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह मामला अकस्मात मृत्यु नहीं, बल्कि हत्या है। परिजनों ने पुराने विवाद, झगड़े और आपसी रंजिश की दिशा में महत्वपूर्ण जानकारी दी। इसके आधार पर 13 अगस्त 2025 को लक्ष्मी मोहन येलमामे (आयु 32 वर्ष), रा. शनिमंदिराजवळ, सिडको, नाशिक ने विस्तृत शिकायत दर्ज कराई, जिस पर मोखाडा पुलिस ने अपराध क्रमांक 157/2025, धारा 103(1), 238(अ), 3(5) के तहत हत्या का मामला दर्ज किया।

◾स्थानीय गुन्हे शाखा ने की सघन जांच — पाँच आरोपी गिरफ्तार
पालघर पुलिस अधीक्षक यतिश देशमुख के मार्गदर्शन में, अपर पुलिस अधीक्षक विनायक नरळे और उपविभागीय पुलिस अधिकारी, जव्हार विभाग समीर मेहेर के पर्यवेक्षण में कई विशेष जांच पथक तैयार किए गए। इन दलों ने समन्वित रूप से काम करते हुए हत्या की घटना से जुड़े हर पहलू की गहनता से जांच की।
स्थानीय गुन्हे शाखा, पालघर की टीम ने मृतक के गांव मोडाळे सहित संबंधित क्षेत्रों में व्यापक चौकशी की, तकनीकी सबूतों का विश्लेषण किया और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी। इस कड़ी मेहनत के परिणामस्वरूप टीम ने हत्या में संलिप्त पाँच व्यक्तियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित की।
गिरफ्तार आरोपियों में संतोष उर्फ अरुण लक्ष्मण धात्रक (36) निवासी समर्थनगर, नाशिक; शिवराम लक्ष्मण वाघ (29) निवासी उंबरडा, त्र्यंबकेश्वर, नाशिक; गोकुल पांडुरंग बेंडकोळी (29), गणेश बाळू बेंडकोळी (22) और संजय संपत पोटकुले (30), सभी गडगड सांगवी, इगतपुरी, नाशिक शामिल हैं। पुलिस ने सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस जांच में स्पष्ट हुआ कि मृतक शरद बोडके और आरोपी संतोष उर्फ अरुण धात्रक के बीच पूर्व में हुए झगड़े की वजह से आरोपी के मन में गहरी रंजिश बैठ गई थी। इस झगड़े में संतोष के माता-पिता और मामा पर हमला हुआ था, जिसमें मामा का पैर भी टूट गया था। इसी रंजिश को निकाले जाने के उद्देश्य से संतोष ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची।
जांच के अनुसार, आरोपी संतोष ने मृतक को शराब पिलाने के बहाने अपने साथ बुलाया। सभी आरोपी उसे स्विफ्ट डिजायर कार MH 15 JW 0807 में बैठाकर त्र्यंबकेश्वर तहसील के जांभुळपाडा के एक सुनसान स्थान पर ले गए। वहाँ उन्होंने उसे शराब पिलाई और फिर लात-घूंसे मारकर बेरहमी से हमला किया। इसके बाद उसका गला दबाकर हत्या कर दी गई और शव के दोनों पैर जंगली बेल से बाँध दिए गए। आरोपियों ने शव को कार में डालकर वैतरणा धरण के पुल के पास पानी में फेंक दिया और फरार हो गए।
तकनीकी जांच, कॉल डिटेल्स, वाहन की गतिविधियों और प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी के आधार पर पुलिस ने सभी पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस मामले की आगे की जांच मोखाडा पुलिस स्टेशन के सहायक उप निरीक्षक प्रेमनाथ ढोले द्वारा की जा रही है।
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हत्या के इस गंभीर प्रकरण की जांच में उत्कृष्ट कार्य करते हुए आरोपी पकड़ने में सफलता हासिल की। इस मामले में जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने अहम भूमिका निभाई, उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा।
जांच का वरिष्ठ मार्गदर्शन पुलिस अधीक्षक यतिश देशमुख, अपर पुलिस अधीक्षक विनायक नरळे और उपविभागीय पुलिस अधिकारी, जव्हार विभाग समीर मेहेर ने किया। इनके दिशा-निर्देशन में स्थानीय गुन्हे शाखा, पालघर की टीम ने घटना की गहन और समन्वित जांच की।
स्थानीय गुन्हे शाखा की टीम में पुलिस निरीक्षक प्रदीप पाटील के नेतृत्व में सहायक पोलीस निरीक्षक योगेश शिंदे, वानखेडे, खोत और गोरखनाथ राठोड, श्रेणी पोलीस उप निरीक्षक नलावडे, पोलीस हवलदार संदीप सूर्यवंशी, दीपक राउत, नरेंद्र पाटील, विजय ठाकुर, संजय धांगडा, पोलीस ना. कल्याण केंगार, प्रशांत निकम, महेश अवतार, तथा साइबर पुलिस ठाणे, पालघर के रूपेश पाटील शामिल थे।
इन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने टीमवर्क, तकनीकी दक्षता और समयबद्ध कार्रवाई के माध्यम से हत्या की गुत्थी सुलझाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कॉल डिटेल्स, वाहन ट्रैकिंग, प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी और अन्य तकनीकी जांचों के माध्यम से आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई। उनके समन्वित प्रयासों से अपराध पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकी।

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