पालघर: 99 हेक्टेयर में बनने वाले ‘पालघर इको पार्क’ का पालकमंत्री गणेश नाईक के हाथों भूमिपूजन संपन्न।
पालघर: 99 हेक्टेयर में बनने वाले ‘पालघर इको पार्क’ का पालकमंत्री गणेश नाईक के हाथों भूमिपूजन संपन्न।
अखिलेश चौबे
पालघर। पालघर शहर की सुंदरता और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देने वाले महत्वाकांक्षी ‘पालघर इको पार्क’ परियोजना का भूमिपूजन और कार्यारंभ समारोह हाल ही में उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। नागपुर से दूरदृश्य प्रणाली के माध्यम से राज्य के वनमंत्री तथा पालघर जिले के पालकमंत्री गणेश नाईक के हाथों इस परियोजना की विधिवत आधारशिला रखी गई।
इस अवसर पर राज्य के प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (वनबल प्रमुख) एम. श्रीनिवास राव, मुख्य वनसंरक्षक (ठाणे) एन. आर. प्रवीण तथा उपवनसंरक्षक (डहाणू) निरंजन दिवाकर सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। पालकमंत्री गणेश नाईक ने इस परियोजना की सराहना करते हुए कहा कि यह इको पार्क पालघरवासियों के लिए प्रकृति के सान्निध्य में एक स्थायी मनोरंजन केंद्र बनेगा और शहर के ‘ग्रीन लंग्स’ के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
डहाणू वन विभाग द्वारा साकार की जा रही यह परियोजना पालघर जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने स्थित वन परिक्षेत्र क्रमांक 131 में विकसित की जा रही है। कुल 99 हेक्टेयर क्षेत्र में फैलने वाली इस विशाल परियोजना पर अनुमानित 134 करोड़ रुपये का खर्च अपेक्षित है। परियोजना को वर्ष 2025-26 से 2027-28 तक तीन वर्षों की अवधि में तीन चरणों में पूरा करने की योजना है। तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहे पालघर शहर में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना और शहर के मध्य भाग में नागरिकों को प्रकृति का अनुभव प्रदान करना, इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य है।
‘पालघर इको पार्क’ केवल एक उद्यान नहीं होगा, बल्कि स्वास्थ्य, पर्यावरण और प्रकृति शिक्षा का एक समग्र केंद्र बनेगा। इसमें नागरिकों के शारीरिक स्वास्थ्य के लिए जॉगिंग ट्रैक और वॉकिंग ट्रैक, कम स्थान में घने वृक्षों का विकास करने वाला ‘मियावाकी घनवन’, तथा मानसिक शांति के लिए विशेष ‘योग साधना मंच’ जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
इसके साथ ही ‘बैंबुसेटम’ के माध्यम से बांस की विभिन्न प्रजातियों का संरक्षण, स्थानीय वनस्पति और जीव-जंतुओं की जानकारी देने वाले विभाग, तथा स्थानीय आदिवासी संस्कृति को प्रदर्शित करने वाले विशेष क्षेत्र भी विकसित किए जाएंगे।
परियोजना के पूर्ण होने के बाद पालघर के नागरिकों को प्रकृति से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा और उनमें पर्यावरण के प्रति जागरूकता तथा अपनत्व की भावना मजबूत होगी, ऐसा वन विभाग का मत है। आगामी तीन वर्षों में यह परियोजना पूरी क्षमता के साथ पालघर की जनता की सेवा में उपलब्ध होगी।
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