प्रशांत संखे के नेतृत्व में बोईसर महोत्सव 2025: लोकसंस्कृति और मनोरंजन का भव्य संगम 19-20 अप्रैल को...! "स्थानीय कलाकारों से लेकर सुर संग्राम के विजेताओं तक, बोईसरवासियों के लिए दो दिन सांस्कृतिक उल्लास के नाम"

प्रशांत संखे के नेतृत्व में बोईसर महोत्सव 2025: लोकसंस्कृति और मनोरंजन का भव्य संगम 19-20 अप्रैल को...! 
"स्थानीय कलाकारों से लेकर सुर संग्राम के विजेताओं तक, बोईसरवासियों के लिए दो दिन सांस्कृतिक उल्लास के नाम"

अखिलेश चौबे 
पालघर..! बोईसर महोत्सव 2025: लोकसंस्कृति और मनोरंजन का भव्य संगम 19-20 अप्रैल को स्थानीय कलाकारों से लेकर सुर संग्राम के विजेताओं तक, बोईसरवासियों के लिए दो दिन सांस्कृतिक उल्लास के नाम
बोईसर के नागरिकों के लिए एक बार फिर हर्ष का विषय है कि इस वर्ष भी बहुप्रतीक्षित और जनप्रिय ‘बोईसर महोत्सव’ का आयोजन भव्य रूप में किया जा रहा है। यह सांस्कृतिक उत्सव 19 अप्रैल से 20 अप्रैल 2025 तक जिले के बोईसर सर्कस ग्राउंड (हार्मनी सोसायटी के समीप) में आयोजित होगा।
दो दिवसीय इस महोत्सव का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं है, बल्कि बोईसर की सांस्कृतिक आत्मा को पुनर्जीवित करना और समाज के सभी वर्गों को एक मंच पर लाना भी है। महोत्सव में पारंपरिक लोकसंगीत, नृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और स्थानीय धरोहरों की झलक देखने को मिलेगी।
पहला दिन: बोईसर की मिट्टी की खुशबू के साथ लोकधारा का प्रवाह 19 अप्रैल को शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक ‘आप-आपल्या गावाची लोकधारा’ नामक विशेष कार्यक्रम का आयोजन होगा। इस सत्र में स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी, जो बोईसर की सांस्कृतिक विरासत, लोककथाओं और ग्रामीण जीवन के रंगों को जीवंत करेंगी।
दूसरा दिन: सुरों की मलिका और सुर संग्राम विजेता की महफिल 20 अप्रैल को वही मंच लोकसंगीत के सुरों से सराबोर हो जाएगा, जब लोकप्रिय लोकगायक व सुर संग्राम विजेता मोहन राठौर और सुरों की मलिका अंकिता दुबे अपनी प्रस्तुति देंगे। संगीतप्रेमियों के लिए यह एक अविस्मरणीय संध्या सिद्ध होगी।
विशेष आकर्षण और सामाजिक समावेशिता इस महोत्सव में प्रवेश पूर्णतः नि:शुल्क रखा गया है ताकि समाज के हर वर्ग का व्यक्ति इसका हिस्सा बन सके। साथ ही, आयोजन स्थल पर गांव-गांव की पारंपरिक वस्तुओं और खानपान से जुड़े स्टॉल भी लगाए जाएंगे, जो बोईसर की विविधता को दर्शाएंगे।
आयोजन समिति की भूमिका और संदेश आयोजन समिति में प्रमुख भूमिका निभा रहे प्रशांत आत्माराम संखे ने बताया, “बोईसर महोत्सव केवल एक मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं, यह हमारे शहर की सांस्कृतिक चेतना का उत्सव है। यह मंच न केवल स्थानीय कलाकारों को अवसर देता है, बल्कि जनता को आपस में जोड़ता भी है।”
उनके साथ अशोक वडे, राहुल पिंपळे, चंदन सिंह और सुंदर राठौड़ भी आयोजन की तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


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