पालघर: जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए सीपीआईएम का विशाल आक्रोश लॉन्ग मार्च।
पालघर: जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए सीपीआईएम का विशाल आक्रोश लॉन्ग मार्च।
अखिलेश चौबे
पालघर। जिले में जल, जंगल और जमीन से जुड़ी समस्याओं के समाधान तथा विनाशकारी परियोजनाओं के विरोध में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की ओर से सोमवार, 19 मार्च को जिलाधिकारी कार्यालय तक विशाल आक्रोश लॉन्ग मार्च का आयोजन किया गया। इस मार्च में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए हजारों लोगों ने भाग लेकर अपने अधिकारों की लड़ाई को एकजुट स्वर में आगे बढ़ाया।
मुंबई–अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर चारोटी नाका से प्रारंभ हुआ यह मार्च पुलिस के व्यापक बंदोबस्त के बीच शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ा। हाथों में बैनर और तख्तियां लिए महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और बुजुर्गों ने नारे लगाते हुए सरकार की नीतियों के खिलाफ आक्रोश प्रकट किया। मार्च में मछुआरा समुदाय, आदिवासी समाज, किसान और मजदूर वर्ग की बड़ी भागीदारी देखी गई, जिससे जनसमर्थन की व्यापकता स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
रैली के दौरान वक्ताओं ने जिले को ‘चौथी मुंबई’ बनाने के नाम पर चल रही विकास योजनाओं को विनाशकारी बताते हुए तीखा विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इस तथाकथित विकास के कारण उनकी आजीविका पर सीधा हमला हो रहा है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। जल स्रोतों का दोहन, जंगलों की कटाई और जमीनों के अधिग्रहण से आम नागरिकों का जीवन संकट में पड़ गया है।
लॉन्ग मार्च में वन पट्टों में गड़बड़ियों को दूर करने, नामांतरण की प्रक्रिया को सरल बनाने, पेसा कानून को प्रभावी रूप से लागू करने, जल जीवन मिशन के कार्यों को पूर्ण करने और मनरेगा के तहत रोजगार सुनिश्चित करने जैसी प्रमुख मांगें उठाई गईं। इसके अलावा क्षेत्र की अन्य ज्वलंत समस्याओं के समाधान की भी मांग की गई।
डहाणू के विधायक विनोद निकोले सहित सीपीआईएम के अन्य नेताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष सभा को संबोधित करते हुए प्रशासन के माध्यम से सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इन मांगों पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप देते हुए मंत्रालय तक मोर्चा निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक जल, जंगल और जमीन पर जनता के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती।
इस विशाल आक्रोश मार्च ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि जिले की जनता अपने अस्तित्व और अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर किसी भी स्तर तक संघर्ष करने के लिए तैयार है।
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